बीकानेर जिले में शिक्षा विभाग की सख्ती के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। औचक निरीक्षण के दौरान पांचू क्षेत्र के पारवां गांव में एक बिना मान्यता के निजी स्कूल संचालित होता मिला, जहां अव्यवस्थित हालात में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।
निरीक्षण में खुली बड़ी लापरवाही
शिक्षा विभाग की टीम सरकारी स्कूलों में कम नामांकन की जांच के लिए क्षेत्र में पहुंची थी। इसी दौरान जानकारी मिली कि पास के एक निजी स्कूल की वजह से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है।
जब टीम ने उक्त निजी स्कूल पर छापा मारा तो वहां चौंकाने वाले हालात सामने आए। स्कूल एक छोटे से 25×20 फीट के मकान में संचालित हो रहा था, जिसमें दो कमरे और एक रसोई घर शामिल थे। हैरानी की बात यह रही कि इसी सीमित जगह में 100 से अधिक बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा था।
रसोई में चल रही थी पढ़ाई
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि रसोई घर में चूल्हा और चिमनी मौजूद थी, लेकिन उसी स्थान का उपयोग बच्चों को बैठाने के लिए किया जा रहा था। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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संचालक के पास नहीं मिले दस्तावेज
स्कूल संचालक मोहनलाल से जब मान्यता से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे स्पष्ट हुआ कि स्कूल पूरी तरह अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई
सीबीईओ प्रेमदान ने बताया कि इस मामले में बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा। फिलहाल अभिभावकों की सहमति से बच्चों को रिलीव करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, इसलिए स्कूल को तुरंत सीज नहीं किया गया है।
हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों का दाखिला केवल मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही करवाएं।
निष्कर्ष
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही और बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को उजागर करता है। प्रशासन की सख्ती से ऐसे अवैध संस्थानों पर रोक लगना जरूरी है ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा मिल सके।

