बीकानेर में लंबे समय से विवादों में घिरे डेहरू माता मंदिर मामले में अब बड़ा कानूनी मोड़ आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके बाद फिलहाल मंदिर परिसर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जा सकेगी।
क्या है पूरा मामला
जैसलमेर हाईवे पर महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पास स्थित डेहरू माता मंदिर को लेकर भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा है। यह मंदिर पुरोहित समाज की कुलदेवी का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है, जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
बीडीए ने इस जमीन को अपने अधिकार क्षेत्र की बताते हुए डेहरू माता सेवा समिति के पदाधिकारियों को नोटिस जारी किए थे। साथ ही, इस स्थान को अतिक्रमण बताते हुए कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी।
हाईकोर्ट का फैसला
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पवन पुरोहित ने बीडीए की कार्रवाई के खिलाफ जोधपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से अधिवक्ता वीरेन्द्र आचार्य और गौरांगी आचार्य ने पक्ष रखा।
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मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बीडीए की प्रस्तावित कार्रवाई पर स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। इस आदेश के बाद अब जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बीडीए मंदिर परिसर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं कर सकेगा।
समाज में राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले से डेहरू माता मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और पुरोहित समाज में राहत की भावना है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में यह आदेश एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या
अब इस मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के दस्तावेज और दावों की गहन जांच होगी। कोर्ट के अंतिम निर्णय पर ही यह तय होगा कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास रहेगा।

