राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए सरकार सक्रिय
बीकानेर। राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
इसी संदर्भ में संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित समिति की दूसरी बैठक जयपुर स्थित उनके सरकारी आवास पर आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित खेजड़ी संरक्षण अधिनियम के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा की गई और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा, उद्योग राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई, विधायक पब्बाराम बिश्नोई, पूर्व विधायक बिहारी लाल बिश्नोई सहित विधि विभाग के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव और विचार साझा किए।
पर्यावरण और ग्रामीण जीवन में खेजड़ी का विशेष महत्व
संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि खेजड़ी वृक्ष राजस्थान की संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
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उन्होंने बताया कि खेजड़ी वृक्ष पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी योगदान देता है। इसलिए राज्य सरकार इसके संरक्षण को लेकर गंभीर है और प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
अन्य राज्यों के कानूनों का किया गया तुलनात्मक अध्ययन
बैठक के दौरान समिति के सामने विभिन्न राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण से जुड़े कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर प्रस्तावित खेजड़ी संरक्षण अधिनियम में शामिल किए जाने वाले प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समिति के सदस्यों ने अवैध कटाई पर प्रभावी नियंत्रण और पर्यावरणीय विरासत को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान तैयार करने पर जोर दिया।
अगली बैठक में पेश होगा विधेयक का प्रारूप
बैठक के अंत में समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी बैठक में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। समिति की अगली बैठक 22 मार्च 2026 को आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।

