वेस्ट एशिया में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारत सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तेज होते संघर्ष के असर को कम करने के लिए केंद्र ने एक इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IMG) का गठन किया है। इसे व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र में ‘स्पेशल फोर्स’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना और व्यापार में व्यवधान को कम करना है।
क्या है इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप
यह समूह विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय से काम करेगा। इसमें शामिल हैं:
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वित्तीय सेवाएं विभाग
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Ministry of External Affairs
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जहाजरानी मंत्रालय
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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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Central Board of Indirect Taxes and Customs
वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने जानकारी दी कि यह ग्रुप रोजाना बैठक कर हालात की समीक्षा कर रहा है। इसका फोकस शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, निर्यात-आयात और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
सप्लाई चेन पर क्यों बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ गया है। विशेष रूप से Strait of Hormuz और बाब एल-मंदब जैसे समुद्री चोकपॉइंट्स पर जोखिम की स्थिति बनी हुई है।
भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा इस क्षेत्र से प्राप्त करता है। ऐसे में यदि समुद्री मार्ग बाधित होता है तो ईंधन की कीमतों और लॉजिस्टिक्स लागत पर सीधा असर पड़ सकता है।
आपातकालीन व्यापारिक उपाय
सरकार ने निर्यातकों और आयातकों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं:
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निर्यात प्रक्रियाओं में लचीलापन
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सीमा शुल्क क्लीयरेंस में तेजी
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वित्तीय संस्थानों और बीमा कंपनियों से समन्वय
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एमएसएमई निर्यातकों के लिए विशेष सहायता
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों के साथ बैठक कर संभावित जोखिमों और वैकल्पिक मार्गों की समीक्षा की है। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, जैसे रूस से आपूर्ति बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
हेल्पलाइन और सहायता
निर्यातकों की समस्याओं के समाधान के लिए DGFT हेल्पडेस्क सक्रिय किया गया है।
हेल्पलाइन नंबर: 1800-572-1550, 1800-111-550
ईमेल: [email protected]
सरकार का कहना है कि किसी भी व्यापारिक बाधा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक सुरक्षा पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम है। युद्ध की अनिश्चितता के बीच सप्लाई चेन की निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि घरेलू बाजार और उद्योग प्रभावित न हों।
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह हालात पर करीबी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उपाय भी लागू किए जा सकते हैं।

