चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में बीकानेर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास और 1 लाख 60 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष जयपाल की अदालत द्वारा सुनाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
अदालत में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार, परिवादी और आरोपी बबला सिंह उर्फ विनोद सिंह के बीच पूर्व से परिचय था। इसी विश्वास के चलते आरोपी ने घरेलू जरूरत बताकर परिवादी से 1 लाख रुपये उधार लिए। काफी समय बीतने के बाद जब रकम वापस मांगी गई, तो आरोपी ने भुगतान के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का एक चेक दिया।
परिवादी ने यह चेक एसबीआई जस्सूसर गेट शाखा में जमा कराया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को विधिवत रजिस्टर्ड कानूनी नोटिस भेजकर राशि की मांग की गई, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। अंततः मामला न्यायालय की शरण में पहुंचा।
बचाव पक्ष की दलील पर अदालत का रुख
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने कोई चेक जारी नहीं किया और उसके साथ किसी प्रकार का लेन-देन नहीं हुआ। उसने चेक के दुरुपयोग की बात भी कही। हालांकि न्यायालय ने पाया कि आरोपी अपने पक्ष में कोई ठोस या विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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कोर्ट ने माना कि कानूनी देनदारी के तहत चेक जारी किया गया, चेक बाउंस हुआ, नियमानुसार नोटिस भेजा गया और निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया। ये सभी तथ्य न्यायालय में प्रमाणित हुए।
अदालत का अंतिम आदेश
इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को छह माह के कारावास की सजा सुनाई और 1,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को 21 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता दीपक गौड़ ने पैरवी की।

