बीकानेर सहित इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) क्षेत्र में एक बार फिर जल प्रबंधन को लेकर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पंजाब की ओर से हरिके हेड से पानी की आपूर्ति कम किए जाने के बाद राजस्थान में नहर का तय रेग्यूलेशन प्रभावित होने लगा है। यदि जल्द ही पानी की मात्रा नहीं बढ़ाई गई, तो प्राथमिकता वाली नहरों के सूखने तक की आशंका जताई जा रही है।
21 जनवरी से लागू हुआ नया रेग्यूलेशन
जल संसाधन विभाग, हनुमानगढ़ कार्यालय स्तर पर 21 जनवरी से आईजीएनपी में तीन में एक समूह का रेग्यूलेशन लागू कर दिया गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा तय वर्तमान जल हिस्सेदारी के अनुसार यह व्यवस्था 13 मार्च तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद आने वाले करीब तीन महीनों तक किसानों को खेतों में 25 दिन के अंतराल से सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
पहले मिल रहा था 17 दिन में पानी
इससे पहले 20 जनवरी तक नहर को चार में से दो समूह के तहत चलाया जा रहा था, जिससे किसानों को लगभग 17 दिन में एक बार पानी मिल रहा था। रेग्यूलेशन बदलने के बाद अब अंतराल बढ़ गया है, जिससे फसलों पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
पंजाब की ओर से पानी घटाने से बढ़ी परेशानी
जानकारी के अनुसार फिरोजपुर फीडर में बंदी के चलते पंजाब ने इंदिरा गांधी फीडर में भी पानी की आपूर्ति कम कर दी है। कॉमन बैंक की सुरक्षा का हवाला देते हुए गुरुवार सुबह हरिके हेड से पानी की मात्रा घटाई गई, जिसका सीधा असर राजस्थान की नहर प्रणाली पर पड़ा।
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अधिकारियों की टीम पहुंची हरिके हेड
रेग्यूलेशन के मुकाबले कम पानी मिलने की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग हरकत में आ गया। विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुनील कटारिया, अधीक्षण अभियंता रामाकिशन सहित अन्य अधिकारियों की टीम तत्काल पंजाब के हरिके हेड पहुंची। वहां पंजाब के अधिकारियों से बातचीत कर पानी की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई।
किसानों में बढ़ी चिंता
नहर में पानी की कमी और बढ़ते अंतराल के चलते किसान पहले से ही चिंतित हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जल संसाधन विभाग की नजर अब पंजाब के अगले फैसले और बीबीएमबी की भूमिका पर टिकी हुई है।

