बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नरसिंदी जिले में रहने वाले चंचल भौमिक की उनके ही गैराज के भीतर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि चंचल रात में गैराज के अंदर सो रहे थे, तभी शटर बाहर से बंद कर पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। जब तक लोग कुछ समझ पाते, उनकी मौत हो चुकी थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
चंचल भौमिक अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मां लंबे समय से बीमार बताई जा रही हैं, बड़े भाई दिव्यांग हैं और छोटे भाई की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि चंचल शांत स्वभाव के थे और किसी से उनका कोई विवाद नहीं था। परिवार को आशंका है कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया अपराध है, जिसके पीछे धार्मिक नफरत की भूमिका हो सकती है।
नरसिंदी में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
नरसिंदी जिला पहले भी अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर चर्चा में रहा है। कुछ हफ्ते पहले इसी इलाके में एक हिंदू दुकानदार की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा, हाल के महीनों में एक हिंदू पत्रकार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या और एक ऑटो चालक को पीट-पीटकर मार देने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। इन मामलों ने स्थानीय हिंदू समुदाय में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
चुनावी माहौल और बढ़ती कटुता
बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। इसी बीच कुछ कट्टरपंथी नेताओं के भड़काऊ बयानों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। चुनावी सभाओं में गैर-मुस्लिमों की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल उठाने और धार्मिक आधार पर शासन की बातें खुले तौर पर कही जा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी का सीधा असर जमीनी स्तर पर हिंसा के रूप में दिख रहा है।
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अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल
लगातार हो रही हत्याओं और हमलों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिक समाज की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। चंचल भौमिक की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस डर की तस्वीर है, जिसमें आज वहां का हिंदू समुदाय जीने को मजबूर है।

