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बीकानेर

कर्तव्य पथ पर राजस्थान की झांकी में बीकानेर की उस्ता कला का भव्य प्रदर्शन

editor
editor Published January 24, 2026
Last updated: 2026/01/24 at 6:36 PM
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देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस परेड समारोह में इस वर्ष राजस्थान की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रहने वाली है। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली राजस्थान की झांकी में इस बार बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला का सजीव और भव्य प्रदर्शन किया जाएगा।

राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि राज्य की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन, कला और संस्कृति मंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में यह झांकी तैयार की जा रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता और उप सचिव अनुराधा गोगिया के मार्गदर्शन में बनाई जा रही इस झांकी में उस्ता कलाकार न केवल अपनी कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे, बल्कि उस्ता कला से बने विशिष्ट उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

इस झांकी की संकल्पना और डिजाइन प्रसिद्ध कलाकार हरशिव शर्मा द्वारा तैयार की गई है। झांकी में राजस्थान की पहचान माने जाने वाले रेगिस्तान के जहाज ऊंट, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनें और लोक कलाकारों का नृत्य भी शामिल रहेगा, जो राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाएगा।

यह झांकी गणतंत्र दिवस परेड के दौरान मुख्य मंच से होकर गुजरेगी, जहां भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश-विदेश के गणमान्य अतिथि इसका अवलोकन करेंगे। डॉ. हर्ष ने बताया कि झांकी का निर्माण दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय रंगशाला परिसर में किया जा रहा है। कर्तव्य पथ पर प्रस्तुति के बाद यह झांकी 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित ‘भारत पर्व’ में भी प्रदर्शित की जाएगी।

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उस्ता कला की अनूठी पहचान
उस्ता कला विश्व की दुर्लभ और विशिष्ट कलाओं में गिनी जाती है। यह कला शुद्ध सोने की पत्तियों, उभरे हुए डिजाइनों और बारीक नक्काशी के लिए जानी जाती है। बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाने वाली इस कला में ऊंट की खाल, लकड़ी और पत्थर पर सोने की मीनाकारी और गोल्ड एम्बॉसिंग की जाती है।

इस कला का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। बीकानेर के जूनागढ़ किले के अनूप महल और फूल महल में आज भी उस्ता कला के उत्कृष्ट उदाहरण देखे जा सकते हैं। फारसी, मुगल और राजपूताना शैलियों का अद्भुत संगम उस्ता कला को विशिष्ट बनाता है। गणतंत्र दिवस परेड में इस कला का प्रदर्शन न केवल बीकानेर बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई देगा।


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editor January 24, 2026
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