जयपुर। राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों और परिवहन विभाग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। नए नियमों के लागू होने और आरटीओ स्तर पर उनके कथित गलत उपयोग से नाराज निजी बस ऑपरेटरों ने 24 जनवरी को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। ऑपरेटरों का आरोप है कि नियमों की आड़ में मनमानी कार्रवाई की जा रही है, जिससे बस संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि
राजस्थान में लगभग दो हजार से अधिक निजी स्लीपर बस ऑपरेटर कार्यरत हैं। बीते कुछ दिनों में परिवहन विभाग ने नियमों के उल्लंघन के नाम पर निजी बसों पर भारी जुर्माना लगाया है और कई बसों को सीज भी किया है। इस कार्रवाई के विरोध में जयपुर के निजी बस ऑपरेटरों ने सामूहिक बैठक कर विरोध जताया।
बस ऑपरेटरों का आरोप है कि 1 सितंबर 2025 से लागू नए केंद्रीय नियम का आरटीओ स्तर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि इसके चलते बस संचालन बाधित हो रहा है और ऑपरेटरों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
24 जनवरी को हड़ताल
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि परिवहन विभाग की कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो 24 जनवरी को निजी बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इस हड़ताल से पूरे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है।
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एसोसिएशन का समर्थन
राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन जयपुर के उपाध्यक्ष मदन यादव ने बताया कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बस ऑपरेटर भी 24 जनवरी की हड़ताल का पूर्ण समर्थन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगामी विधानसभा सत्र में सभी बस ऑपरेटर जयपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें
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पूर्व रजिस्टर्ड बसें: 1 सितंबर 2025 से पहले रजिस्टर्ड बसों पर लगाए गए जुर्माने और सीज को रद्द किया जाए।
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ग्रामीण बस कैरियर: ग्रामीण बसों पर लगे कैरियर को हटाने के आदेश को नियम के विपरीत बताया।
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AITP परमिट: मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की तरह राजस्थान में भी टैक्स समानुपातिक हो।
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फायर अलार्म सिस्टम: फायर अलार्म सिस्टम बस चेसिस निर्माता कंपनी द्वारा लगाया जाए; बस ऑपरेटरों पर इसकी जिम्मेदारी न हो।
बस ऑपरेटरों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

