राजस्थान की मिड डे मील योजना में अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक का खुलासा हुआ है। करीब 2023 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस प्रकरण में सरकारी अधिकारियों, सार्वजनिक संस्थानों और निजी कंपनियों की मिलीभगत सामने आई है, जबकि कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नामों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
कोविड काल में सप्लाई के नाम पर बड़ा खेल
एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने की अवधि से जुड़ा है। उस समय विद्यार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के नाम पर मिड डे मील योजना के तहत कॉनफैड के माध्यम से दाल, तेल, मसाले सहित कॉम्बो पैकेट की आपूर्ति दर्शाई गई। कागजों में इसे एफएसएसएआई और एगमार्क मानकों के अनुरूप बताते हुए स्कूलों तक डोर-स्टेप डिलीवरी का दावा किया गया।
जांच में सामने आया कि 3.12 करोड़ कॉम्बो पैकेट की आपूर्ति दिखाई गई, जबकि जमीनी स्तर पर आपूर्ति को लेकर गंभीर संदेह पाए गए। इन्हीं फर्जी दावों के आधार पर 2023 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान उठा लिया गया।
टेंडर प्रक्रिया में मनमाने बदलाव
एसीबी जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों और कॉनफैड के अफसरों ने आपसी मिलीभगत से टेंडर नियमों में बदलाव किए। योग्य और पात्र फर्मों को बाहर कर चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। टेंडर मिलने के बाद कई मामलों में कार्य को अवैध रूप से सबलेट किया गया, जिससे फर्जी सप्लायर और ट्रांसपोर्टरों का संगठित नेटवर्क खड़ा हो गया।
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कई प्रकरणों में वास्तविक खरीद और आपूर्ति के बिना ही ऊंची दरों के फर्जी बिल तैयार कर सरकारी भुगतान उठा लिया गया। इससे राज्य सरकार को लगभग 2000 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय क्षति होने की बात सामने आई है।
किन-किन पर दर्ज हुआ मामला
एसीबी ने फिलहाल कॉनफैड के 8 अधिकारी-कर्मचारी, केंद्रीय भंडार के 3 अधिकारी और निजी फर्मों के प्रोपराइटर समेत 21 व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें कॉनफैड के सहायक लेखाधिकारी सांवतराम, नागरिक आपूर्ति प्रबंधक राजेंद्र, लोकेश कुमार बापना, प्रतिभा सैनी, योगेंद्र शर्मा, राजेंद्र सिंह शेखावत, रामधन बैरवा, दिनेश कुमार शर्मा सहित अन्य शामिल हैं।
इसके अलावा तिरुपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज, एमटी एंटरप्राइजेज और साई ट्रेडिंग के संचालकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
राजनीतिक कनेक्शन भी जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार इस घोटाले में पूर्व गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव के दो पुत्रों और कुछ रिश्तेदारों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। साथ ही 5 आईएएस अधिकारियों सहित करीब 40 अधिकारियों की भूमिका जांच में सामने आई है। सरकार से नए कानून 17-ए के तहत 33 अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति मांगी गई थी, जिनमें से फिलहाल 13 के खिलाफ स्वीकृति मिल पाई है।
पहले भी हो चुकी हैं जांच एजेंसियों की कार्रवाई
यह मामला पहले भी चर्चा में रह चुका है। पूर्व में ईडी और आयकर विभाग ने भी मिड डे मील आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर राजस्थान सहित कई राज्यों में छापेमारी की थी। हालांकि, बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब एसीबी की ताजा कार्रवाई से यह घोटाला फिर सुर्खियों में आ गया है।
फैक्ट फाइल
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66,341 शिक्षण संस्थानों तक कॉम्बो पैकेट पहुंचाने का दावा
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62.67 लाख विद्यार्थी
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3.12 करोड़ कॉम्बो पैकेट कागजों में सप्लाई
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2023 करोड़ रुपये का भुगतान
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कक्षा 1 से 5: 4.97 रुपये प्रति विद्यार्थी
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कक्षा 6 से 8: 7.45 रुपये प्रति विद्यार्थी
एसीबी ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा नए नाम सामने आ सकते हैं।

