बांग्लादेश में थम नहीं रही हिंसा
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते 22 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर हुई हिंसक वारदातों में सात लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था और अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डुबोकर हत्या से फैली सनसनी
ताजा मामला एक हिंदू युवक की निर्मम हत्या से जुड़ा है, जहां उग्र भीड़ ने उसे नदी में डुबोकर मार डाला। यह घटना हिंसा के उस खौफनाक स्वरूप को उजागर करती है, जिसमें हमलावर बिना किसी डर के कानून को अपने हाथ में लेते नजर आ रहे हैं। पीड़ित की पहचान मिथुन के रूप में हुई है।
दुकानदार पर हमला, इलाज के दौरान मौत
नरसिंदी जिले में मोनी चक्रवर्ती नामक एक छोटे दुकानदार पर देर रात उनकी दुकान पर हमला किया गया। धारदार हथियारों से गंभीर रूप से घायल मोनी चक्रवर्ती को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह घटना इलाके में तनाव और भय का कारण बन गई है।
पत्रकार और कारोबारी भी बने निशाना
हिंसा की चपेट में केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि पत्रकार और कारोबारी भी आ रहे हैं। पत्रकार राणा प्रताप बैरागी को दिनदहाड़े उनकी फैक्ट्री से बाहर बुलाकर गोली मार दी गई। वहीं, कारोबारी खोकोन दास पर उग्र भीड़ ने हमला कर पेट्रोल छिड़क कर उन्हें जिंदा जला दिया। कुछ मामलों में ईशनिंदा जैसे आरोपों का सहारा लेकर भीड़ द्वारा हत्या की गई।
- Advertisement -
18 दिसंबर के बाद बढ़ा डर का माहौल
18 दिसंबर से अब तक जिन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, उनमें दीपू दास, राणा प्रताप बैरागी, अमृत मंडल, बज्रेंद विश्वास, खोकोन दास, मोनी चक्रवर्ती और मिथुन शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि कई घटनाएं डर या दबाव के कारण रिपोर्ट ही नहीं हो पातीं, जिससे वास्तविक आंकड़ा और अधिक हो सकता है।
मॉब लिंचिंग पर वैश्विक चिंता
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता और कमजोर कार्रवाई ने हमलावरों का हौसला बढ़ाया है। कई हिंदू परिवारों ने असुरक्षा के डर से अपने घर छोड़ना शुरू कर दिया है।
तनावपूर्ण शांति, लेकिन भरोसा नहीं
फिलहाल प्रभावित इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस ने कुछ मामलों में केस दर्ज किए हैं, लेकिन अब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
धर्मनिरपेक्ष छवि पर गहरा आघात
विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे केवल सांप्रदायिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और कट्टरपंथी ताकतों की भूमिका भी हो सकती है। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें और झूठे आरोप हालात को और भड़का रहे हैं। लगातार हो रही हिंसा बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष छवि और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

