बांग्लादेश में हिंसा की नई लहर, अल्पसंख्यकों में दहशत
बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा ने सिर उठा लिया है। हाल के हफ्तों में हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की खबरों ने देश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, बीते 19 दिनों में हिंदू समुदाय के छह लोगों की अलग-अलग घटनाओं में हत्या की गई है। इन घटनाओं के बाद देशभर में डर और असुरक्षा का माहौल है।
कारोबारी की हत्या से बढ़ी चिंता
ताजा मामला नरसिंदी जिले का बताया जा रहा है, जहां एक स्थानीय हिंदू कारोबारी शरद चक्रवर्ती मनी पर बाजार क्षेत्र में हमला किया गया। वह लंबे समय से किराना दुकान चला रहे थे। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों और हिंदू समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी है।
पहले भी हो चुकी हैं टारगेट किलिंग की घटनाएं
इससे पहले एक हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की हत्या की खबर सामने आई थी। बताया गया कि उन्हें घर से बाहर बुलाकर गोली मारी गई। इसके अलावा दीपू दास, अमृत मंडल, बज्रेंद विश्वास और खोकोन दास जैसे नाम भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनकी मौत हालिया हिंसा से जोड़ी जा रही है। कुछ मामलों में आरोप भीड़ द्वारा हिंसा के हैं, तो कहीं व्यक्तिगत दुश्मनी और कट्टरपंथी सोच की आशंका जताई गई है।
ईशनिंदा के आरोप और भीड़ की हिंसा
कुछ पीड़ितों पर कथित ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे आरोपों के नाम पर भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
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सरकार की भूमिका पर उठे सवाल
देश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि हिंसा की इन घटनाओं को रोकने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। जो आंकड़े सामने आए हैं, वे केवल उन्हीं मामलों के हैं जो सार्वजनिक हो सके, जबकि वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
सुरक्षा और जवाबदेही की मांग
इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने सरकार से मांग की है कि वह कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू करे, निष्पक्ष जांच कराए और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी समुदाय को उसकी पहचान के आधार पर निशाना न बनाया जाए।

