राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में फर्जी भुगतान और अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा कार्रवाई में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए चार फार्मा स्टोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है, जबकि दो फार्मा स्टोर को योजना से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, इस घोटाले में संलिप्त पाए गए 14 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और 19 अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए हैं।
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार आरजीएचएस जैसी जनकल्याणकारी योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या दुरुपयोग को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और गलत गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए नियमित जांच और कड़ी कार्रवाई की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज करवाने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा रहे हैं। साथ ही, तकनीकी सुधारों के जरिए योजना को और मजबूत किया जा रहा है।
27 लाख रुपये का फर्जी भुगतान उजागर
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि भीलवाड़ा जिले के हरिकृष्णा मेडिकल स्टोर और सावरिया फार्मा स्टोर द्वारा गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में सामने आया कि इन फार्मा स्टोर ने उन दवाओं और इंजेक्शनों का विक्रय दिखाकर भुगतान उठा लिया, जिन्हें उन्होंने खरीदा ही नहीं था। इस तरह करीब 27 लाख रुपये का फर्जी भुगतान आरजीएचएस योजना के तहत उठा लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त औषधि नियंत्रक ने दोनों स्टोर के ड्रग लाइसेंस निरस्त कर एफआईआर दर्ज करवाई है।
इन जिलों में भी दर्ज हुई FIR
इसी क्रम में नागौर जिले के रेन और जायल स्थित कॉन्फेड फार्मा स्टोर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। इन स्टोरों पर आरोप है कि इन्होंने आरजीएचएस पर्चियों में छेड़छाड़ कर गलत तरीके से भुगतान प्राप्त किया। इसके अलावा गंभीर अनियमितताओं के चलते कॉन्फेड फार्मा शॉप नंबर 06, बीकानेर और शॉप नंबर 05, हनुमानगढ़ को आरजीएचएस योजना से निलंबित कर दिया गया है।
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कर्मचारियों और लाभार्थियों पर भी कार्रवाई
अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल ने बताया कि लाभार्थियों द्वारा आरजीएचएस कार्ड के दुरुपयोग के मामलों में 19 लोगों के खिलाफ रिकवरी और विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को पत्र जारी किए गए हैं। इससे पहले भी ऐसे मामलों में 54 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। ताजा कार्रवाई में पुलिस विभाग के 4 और आयुर्वेद विभाग के 10 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

