क्या है राजस्थान की ग्रीन क्रेडिट नीति
ग्रीन क्रेडिट नीति, कार्बन क्रेडिट मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है। इसके अंतर्गत यदि कोई निवेशक या शहरी स्थानीय निकाय पर्यावरण को बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं में पूंजी लगाता है, तो उसे सरकार की ओर से ग्रीन क्रेडिट वाउचर दिया जाएगा। यह वाउचर भविष्य की परियोजनाओं में वित्तीय छूट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर दूसरी कंपनियों को बेचा भी जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है
राज्य सरकार का मकसद पर्यावरणीय लक्ष्यों को आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़कर ग्रीन और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि निजी निवेशकों और शहरी निकायों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
किन क्षेत्रों में निवेश पर मिलेगा लाभ
इस नीति के तहत कई अहम सेक्टर्स को शामिल किया गया है, जिनमें—
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नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं
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जल संरक्षण और जल प्रबंधन
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जैविक और सतत कृषि
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अपशिष्ट प्रबंधन
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वायु प्रदूषण नियंत्रण उपाय
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ऊर्जा दक्षता और हरित इन्फ्रास्ट्रक्चर
ग्रीन क्रेडिट वाउचर कैसे मिलेगा
ग्रीन क्रेडिट वाउचर उन निवेशकों को दिए जाएंगे, जो इन क्षेत्रों में पर्यावरण हितैषी परियोजनाओं पर निवेश करेंगे। यह लाभ RIPS-2024 के अंतर्गत मिलने वाले अन्य ग्रीन इंसेंटिव्स के अतिरिक्त होगा।
कितना मिलेगा आर्थिक फायदा
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₹1 करोड़ तक के निवेश पर: निवेश राशि का 5 प्रतिशत
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₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ तक के निवेश पर: 7.5 प्रतिशत
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₹10 करोड़ से अधिक के निवेश पर: 10 प्रतिशत
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अधिकतम सीमा: एक निवेशक को अधिकतम ₹2.5 करोड़ तक का ग्रीन क्रेडिट
शहरी निकायों को भी मिलेगा लाभ
शहरी स्थानीय निकाय यदि अपने संसाधनों से हरित परियोजनाएं विकसित करते हैं, तो उन्हें भी इसी पैटर्न पर ग्रीन क्रेडिट वाउचर दिए जाएंगे। इससे शहरों में टिकाऊ विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्यों अहम है यह नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन क्रेडिट नीति से राजस्थान में पर्यावरणीय परियोजनाओं में निजी निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ दिशा मिलेगी। साथ ही यह पहल राजस्थान को हरित विकास के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।