Khabar21
  • होम
  • बीकानेर
  • राजस्थान
  • देश-दुनिया
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • धार्मिक
  • करियर
  • खेल
Reading: अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने आदेश पर रोक, नई समिति बनेगी
Share
Aa
Aa
Khabar21
  • होम
  • बीकानेर
  • राजस्थान
  • देश-दुनिया
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • धार्मिक
  • करियर
  • खेल
Search
  • होम
  • बीकानेर
  • राजस्थान
  • देश-दुनिया
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • धार्मिक
  • करियर
  • खेल
Follow US
Khabar21 > Blog > राजस्थान > अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने आदेश पर रोक, नई समिति बनेगी
राजस्थान

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने आदेश पर रोक, नई समिति बनेगी

editor
editor Published December 29, 2025
Last updated: 2025/12/29 at 5:44 PM
Share
SHARE
Chat on WhatsApp
Share News

Save Aravalli: अरावली की परिभाषा पर फिर बदला रुख

जयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर चल रहे लंबे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मोड़ लेते हुए अपने ही पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। 29 दिसंबर को अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी तकनीकी, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक पहले जारी दिशा-निर्देशों को लागू नहीं किया जाएगा और यथास्थिति बनी रहेगी।

Contents
Save Aravalli: अरावली की परिभाषा पर फिर बदला रुखक्या था ‘100 मीटर नियम’पर्यावरणविदों ने क्यों जताई आपत्तिसुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगे जवाब21 जनवरी 2026 को अगली सुनवाईकोर्ट की टिप्पणियों पर भी दी सफाईपुराने मामलों से भी जुड़ा है विवाद

यह फैसला अरावली क्षेत्र में खनन, निर्माण और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर दूरगामी असर डाल सकता है।


क्या था ‘100 मीटर नियम’

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित “100 मीटर नियम” को स्वीकार किया था। इस नियम के तहत जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची किसी भी भू-आकृति को अरावली पहाड़ी माना गया था। वहीं, 500 मीटर के दायरे में मौजूद दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों को मिलाकर अरावली रेंज की श्रेणी में रखा गया था।

सरकार का तर्क था कि इससे अरावली की एक स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा तय होगी, जिससे नियमों को लागू करना आसान होगा।

- Advertisement -

पर्यावरणविदों ने क्यों जताई आपत्ति

इस परिभाषा को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना था कि 100 मीटर की सीमा तय करने से अरावली का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है। इससे वैध और अवैध दोनों तरह के खनन को बढ़ावा मिलने का खतरा पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी थी कि अरावली पर्वतमाला भूजल संरक्षण, जैव विविधता और थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में परिभाषा में किसी भी तरह की ढील पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकती है।


सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगे जवाब

इन आपत्तियों को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिभाषा से संरक्षण का दायरा सीमित होने का खतरा नजर आता है। इसी के साथ केंद्र सरकार से कई तकनीकी और पर्यावरणीय सवालों पर विस्तृत जवाब मांगा गया है।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक नई हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा, जो अरावली की भौगोलिक स्थिति, पर्यावरणीय प्रभाव और संरक्षण के उपायों पर रिपोर्ट देगी।


21 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं। पीठ ने साफ किया कि 20 नवंबर को दिया गया आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं रहेगा।

मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।


कोर्ट की टिप्पणियों पर भी दी सफाई

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिससे भ्रम फैल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले एक ठोस, वैज्ञानिक और निष्पक्ष रिपोर्ट बेहद जरूरी है।

कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और रेंज की परिभाषा, 500 मीटर के दायरे का औचित्य, खनन पर पूर्ण प्रतिबंध या सशर्त अनुमति जैसे मुद्दों पर स्पष्टता की जरूरत बताई है।


पुराने मामलों से भी जुड़ा है विवाद

यह मामला टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपद केस से भी जुड़ा हुआ है, जिसके तहत देशभर में वन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। पहले के आदेशों में कोर और अछूते क्षेत्रों में खनन पर रोक, अवैध खनन पर सख्ती और सतत विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई थी।


Share News
Chat on WhatsApp

editor December 29, 2025
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print

Latest Post

गर्मी को देखते हुए विद्युत तंत्र सुधारना जरूरी 
Bijali बीकानेर राजस्थान
आरटीई प्रवेश की लॉटरी जारी, 6.34 लाख अभिभावकों का इंतजार खत्म
बीकानेर
चूरू में तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से किसान की मौत
राजस्थान
शनिवार को पूरे दिन खुले रहेंगे बीकेईएसएल के बिजली बिल कैश काउंटर
बीकानेर
बीकानेर में गैस सिलेंडर वाहनों पर कड़ी निगरानी, जरूरत पर पुलिस तैनाती
बीकानेर
बीकानेर में शुक्रवार को कई क्षेत्रों में चार घंटे बिजली कटौती
बीकानेर
बीकानेर में गैस सिलेंडरों से भरी टैक्सी चालक के ऊपर चढ़ी, मौत
बीकानेर
इलाज के लिए अस्पतालों में भटकता रहा युवक, लापरवाही से मौत का आरोप
बीकानेर

You Might Also Like

Bijaliबीकानेरराजस्थान

गर्मी को देखते हुए विद्युत तंत्र सुधारना जरूरी 

Published March 12, 2026
राजस्थान

चूरू में तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से किसान की मौत

Published March 12, 2026
बीकानेरराजस्थानशिक्षा

सिंथेसिस, बीकानेर में सत्र 2026-27 के नए बैच 16 मार्च से प्रारंभ

Published March 11, 2026
बीकानेरराजस्थान

खेजड़ी संरक्षण कानून बनाने की तैयारी तेज, समिति ने किया विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन

Published March 11, 2026
Khabar21
Follow US

© Copyright 2022, All Rights Reserved Khabar21 | Designed by Uddan Promotions Pvt. Ltd.

  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
1520138487750

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?