

बाड़मेर।बाड़मेर शहर के युवाओं ने जैसलमेर स्थित रामदेवरा के लिए 70 किलो वजनी घोड़ा तैयार करवाया है। कपड़े और लकड़ी से बने इस घोड़े को लेकर युवाओं का जत्था यहां से 17 सितंबर को रवाना होगा। बाड़मेर से रामदेवरा की दूरी 200 किमी है। वहीं बाबा के दरबार में इसे चढ़ाया जाएगा।12 फीट 70 किलो वजनी घोड़े की सवारी को युवा 17 सितंबर को रामदेवरा पैदल लेकर जाएंगे।दरअसल, जैसलमेर जिले के विश्व विख्यात रामदेवरा मंदिर का मेला शुरू हो गया है। देशभर से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। यहां बाबा की ध्वजा उनकी आस्था का प्रतीक है तो मान्यता के अनुसार घोड़ा उनकी सवारी का प्रतीक है। हालांकि, प्रतीक के रूप में कपड़े और लकड़ी से बने घोड़े चढ़ाए जाते हैं। लेकिन, वर्तमान समय में श्रद्धालु असली घोड़े भी चढ़ा रहे हैं।घोड़े की सवारी बाड़मेर पहुंचने पर मोहल्ले में महिलाओं, बच्चे और युवाओं में जबरदस्त उत्साह।श्रद्धालु विनोद कुमार का कहना है कि हमारे वाल्मीकि समाज के 10 युवाओं का ग्रुप है। हमने स्पेशल ऑर्डर देकर 12 फीट का लकड़ी, कपड़े से घोड़े की सवारी जोधपुर से तैयार करवाई है। इसका वजन करीब 70 किलो है। हम बीते 6-7 सालों से रामदेवरा पैदल जा रहे हैं। लेकिन, पहली बार 12 फीट ऊंचा घोड़ा हम अपने कंधों पर रखकर रामदेवरा मंदिर में जाएंगे। 17 सितंबर को बाड़मेर से जुलूस निकालकर रवाना होंगे। करीब 200 किलोमीटर का सफर तय करके रामदेवरा पहुंचेगे।जोधपुर में हुआ तैयार गुरुवार को जोधपुर से बनवाए गए घोड़े को बाड़मेर लाया गया। घोड़े को देखकर हर कोई अचंभित रह गया। मोहल्ले में पहुंचने पर डीजे की धुन पर महिलाएं, युवा व बच्चियां नाचते, झूमते नजर आए। लकड़ी व कपड़े से बना घोड़ा सफेद रंग का है। इसको वास्तविक रूप देने के लिए हूबहू असली घोड़े की तरह सजाया गया है। इसमें मोरा, साज, सेवर, घुंघरु, पायल, पीरियां, झीन, झाल, चादर, लगाम व फूलों से सजी झाली का उपयोग किया गया है।

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