

बाड़मेर।बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर तारातरा गांव में पिछले 15 दिनों से लेपर्ड की दहशत से ग्रामीण परेशान थे। करीब एक सप्ताह से वन विभाग और जोधपुर रेस्क्यू टीमें गांव में डेरा डाले हुए थी। गुरुवार को लेपर्ड पहाड़ों से तारातरा व लीलसर गांव की तरफ मूवमेंट देखने को मिला है। इसके बाद वन विभाग एवं जोधपुर टीमों ने करीब 10 घंटे लगातार रेस्क्यू कर लेपर्ड लीलसर गांव में पेड़ के नीचे बैठा नजर आया। करीब चार बजे लीलसर गांव में लेपर्ड ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में डाल दिया गया। वहां से लेपर्ड को बाड़मेर लेकर आ रहे है। वहीं रेस्क्यू टीमों का ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग किया।टीमें दूरबीन की मदद से ट्रेंकुलाइजर गन से किया रेस्क्यू।दरअसल, तारातरा गांव में 15 दिन पहले लेपर्ड का मूवमेंट देखने को मिला था। रात के समय में 60-70 मवेशियों का अपना शिकार बना दिया। वन विभाग की टीम ने पगमार्क के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रात के समय में पिंजरे भी लगाए लेकिन टीम को सफलता हाथ नहीं लगी। पगमार्क जोधपुर रेस्क्यू टीम को भेजने के बाद यह कन्फर्म हो गया कि लेपर्ड ही है। 5 दिन पहले जोधपुर की रेस्क्यू टीम बाड़मेर पहुंची और लगातार सर्च ऑपरेशन किया। लेकिन बीते तीन दिन से लेपर्ड तारातरा के पहाड़ों में छिप गया था। पहाड़ों में टीमों द्वारा रेस्क्यू करना मुश्किल था।वन विभाग व जोधपुर टीम ने रेस्क्यू कर पिजरें में कैद किया लेपर्ड को।सुबह पहाड़ों से उतरते देखा ग्रामीणों ने गुरुवार को सुबह के समय पहाड़ों से नीचे उतरते ग्रामीणों ने देख लिया। इस पर सुबह से टीमों ने पगमार्क के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तारातरा गांव से सर्च ऑपरेशन लीलसर गांव तक पहुंच। करीब 3:30 बजे टीम को खेजड़ी के पेड़ के नीचे लेपर्ड देखा। इस पर टीम ने दूरबीन की मदद से ट्रेंकुलाइजर गन से ट्रेकुलाइज कर लिया। इसके बाद स्थानीय ग्रामीण व टीम ने लेपर्ड को पिजरें में बंद कर दिया।डॉक्टरों करके जांच रेंजर चद्रप्रकाश कौशिक के मुताबिक लेपर्ड (पैथर) को लीलसर गांव से पिजरें में डालकर बाड़मेर लेकर आ रहे रहे है। वेटेंनरी डॉक्टर द्वारा लेपर्ड को चैक किया जाएगा। इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार उसे रिलीज किया जाएगा।बीते 15 दिनों से तारातरा गांव के ग्रामीण दहशत में। 70 मवेशियों को बनाया शिकार।ग्रामीण हिमताराम देवासी का कहना है कि गुरुवार को सुबह लेपर्ड का मूवमेंट गांव की तरफ देखने को मिला। इसके बाद से टीमें लगातार रेस्क्यू कर रही है। लेकिन लेपर्ड कभी पहाड़ों और झाड़ियों में छिप गया है। गांव में करीब 70 मवेशियों को शिकार बना दिया है। वहीं, पूरा गांव बीते 15 दिनों से दहशत में है।जोधपुर रेस्क्यू टीम के मुताबिक शनिवार को हम लोग बाड़मेर तारातरा पहुंच गए थे। ग्रामीणों ने मवेशियों को मारे जाने के बारे में बताया था। पगमार्क देखे वो भी लेपर्ड के ही हैं। लेपर्ड जहां पर अभी छिपा है वो पहाड़ियों और जंगल का एरिया है। ऐसी जगह जानवर को पकड़ना मुश्किल है। ट्रेंकुलाइज तब करते है जब जानवर आबादी या खुली जगह में आ जाए। पहाड़ी इलाके में पैदल जाकर ट्रेंकुलाइज करना ठीक नहीं है।
