Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आपको लिवर या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो कृपया किसी योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। लेखक और वेबसाइट इस लेख के आधार पर किसी भी स्वास्थ्य जोखिम या परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
लिवर हमारे शरीर का एक अहम अंग है, जो रक्त को साफ करने, पाचन में मदद करने और शरीर से विषैले तत्व निकालने का काम करता है। लेकिन लिवर की बीमारियां अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती हैं, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।
लिवर बीमारी: साइलेंट किलर क्यों?
शुरुआती चरण में लिवर रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते। न दर्द होता है, न कोई बड़ी परेशानी महसूस होती है। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, जबकि लिवर धीरे-धीरे प्रभावित होता है।
आजकल गलत खानपान, अधिक मोटापा, शराब का सेवन और टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्याओं की वजह से लिवर फैटी होने और खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
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शुरुआती पहचान से क्या फायदे हैं?
यदि लिवर रोग समय रहते पहचान लिया जाए, तो इसे नियंत्रित या पलटा जा सकता है। इसके लिए कुछ आसान बदलाव मददगार साबित होते हैं:
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संतुलित खानपान अपनाना
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शराब से दूरी बनाना
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वजन पर नियंत्रण रखना
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ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का नियमित परीक्षण
इन सरल उपायों से लिवर को दोबारा स्वस्थ बनाया जा सकता है। वहीं, यदि बीमारी देर से पकड़ी जाए, तो सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
GP क्लीनिक में स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
यूके में शुरू हुए नए रिसर्च प्रोग्राम के तहत हाई-रिस्क लोगों की जांच सीधे GP क्लीनिक में की जा रही है। इससे शुरुआती चरण में लिवर रोग का पता चल सकता है। अधिकतर लोग तब तक अस्पताल नहीं जाते जब तक हालत गंभीर न हो जाए। यदि आम हेल्थ चेकअप में लिवर स्क्रीनिंग शामिल हो, तो लाखों लोगों को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।
बिना दर्द वाले टेस्ट
इस रिसर्च में बायोप्सी जैसी जटिल और डराने वाले टेस्ट की जगह आसान, सुरक्षित और बिना दर्द वाले टेस्ट किए जा रहे हैं। इन टेस्ट का परिणाम जल्दी मिलता है और मरीजों का डर भी कम होता है।
हेल्थ सिस्टम पर सकारात्मक असर
यदि ऐसी स्क्रीनिंग सफल होती है, तो मरीजों की सेहत में सुधार होगा और हेल्थ सिस्टम पर भी बोझ कम होगा। गंभीर लिवर बीमारी का इलाज महंगा और लंबा होता है, जबकि शुरुआती रोकथाम सस्ती और प्रभावी होती है।

