मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। Strait of Hormuz को लेकर ईरान और इजरायल के बीच टकराव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सख्त रुख अपनाते हुए जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
ईरान का कड़ा संदेश
सूत्रों के अनुसार, Iran की नौसेना ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे कई जहाजों को रेडियो के माध्यम से चेतावनी दी है। संदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बिना पूर्व अनुमति कोई भी जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकता। नियमों का उल्लंघन करने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
ईरान का यह कदम हाल ही में हुए हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनका आरोप Israel पर लगाया जा रहा है। तेहरान का कहना है कि उसकी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब सख्ती से दिया जाएगा।
सीजफायर पर संकट
कुछ समय पहले Donald Trump की पहल पर दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम (ceasefire) पर सहमति बनी थी। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखना था।
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लेकिन हालिया घटनाओं ने इस समझौते को कमजोर कर दिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि इजरायल ने युद्धविराम का उल्लंघन किया, जिसके बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई।
वैश्विक बाजार पर असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है।
इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। कई देशों के जहाज फिलहाल इस क्षेत्र के पास रुके हुए हैं, जिससे व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हालांकि अभी तक United States और इजरायल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
China और Pakistan जैसे देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो यह संकट बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि कूटनीति इस तनाव को कम कर पाती है या नहीं। यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।


