झारखंड के Hazaribag जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अंधविश्वास के नाम पर एक मां द्वारा अपनी ही बेटी की हत्या किए जाने के आरोप ने समाज और कानून-व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में Jharkhand High Court ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन से जवाब तलब किया है।
बीमारी के इलाज के नाम पर रची साजिश
पुलिस जांच के अनुसार, महिला अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए एक कथित तांत्रिक के संपर्क में थी। तांत्रिक ने उसे विश्वास दिलाया कि बेटे को ठीक करने के लिए एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। इसी अंधविश्वास के चलते घटना की साजिश रची गई।
बताया जा रहा है कि रामनवमी के दौरान अष्टमी की रात, जब गांव में जुलूस और धार्मिक आयोजन चल रहे थे, उसी समय घर के भीतर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। आरोप है कि किशोरी की गला दबाकर हत्या की गई, जिसमें उसकी मां के अलावा दो अन्य लोग भी शामिल थे।
तीन आरोपी गिरफ्तार
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में मृतका की मां, कथित तांत्रिक और एक अन्य सहयोगी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया।
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हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को गांव के एक बगीचे में दफना दिया। जांच को गुमराह करने के लिए झूठी कहानी भी गढ़ी गई, लेकिन पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में सच्चाई सामने आ गई। पुलिस का कहना है कि इस अपराध में क्रूरता की सारी सीमाएं पार की गईं, जिसकी विस्तृत जांच जारी है।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए Jharkhand High Court की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने इस मामले को लेकर हजारीबाग में बंद का आह्वान किया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर अंधविश्वास और कुरीतियों के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता के अभाव में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, जिन्हें रोकने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा।


