राज्यसभा ने बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बिल के लागू होने के बाद देश के पांच प्रमुख अर्धसैनिक बल—CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB—की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव होगा।
बिल से क्या बदलाव होंगे
CAPF बिल के तहत इन पांचों बलों को एक ही कानूनी ढांचे में लाया गया है। पहले हर बल के लिए अलग नियम, भर्ती प्रक्रिया, प्रमोशन और सेवा शर्तें थीं। अब यह सभी नियम एक समान होंगे, जिससे कार्यक्षमता और प्रशासनिक प्रक्रिया में एकरूपता आएगी।
सबसे चर्चा का विषय यह है कि अब इन बलों की शीर्ष पदों पर केवल IPS अफसर ही नियुक्त होंगे। इसके अनुसार:
- Inspector General (IG) के 50% पद
- Additional DG के कम से कम 67% पद
- Special DG और DG के सभी पद
सिर्फ IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे।
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CAPF अफसरों की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के सांसद Saket Gokhale ने कहा कि CAPF अफसरों को मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और यह बिल उनके लिए असंतोष पैदा करेगा। शिवसेना की सांसद Priyanka Chaturvedi ने कहा कि यह बिल CAPF और IPS के बीच असमानता पैदा करता है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है, जिसमें IPS तैनाती को धीरे-धीरे कम करने को कहा गया था।
विपक्ष का विरोध
विपक्ष ने बिल को सेलेक्ट कमिटी में भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। राज्यसभा में भाजपा नेता और सदन के नेता JP Nadda ने विपक्ष पर संसदीय परंपराओं का पालन न करने का आरोप लगाया।
सरकार का तर्क
गृह राज्यमंत्री Nityanand Rai के अनुसार यह बिल जवानों की भलाई के लिए लाया गया है। CAPF अफसरों की तरक्की में बाधाओं को दूर किया जाएगा, पोस्टिंग तय समय पर होगी और शिकायत निपटाने की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। BJP सांसद Ajit Gopchhade ने कहा कि यह सिस्टम अब जवानों के लिए काम करेगा।
कानून की विशेष शर्त
बिल में यह भी प्रावधान है कि यदि भविष्य में यह कानून किसी पुराने कानून या अदालती आदेश से टकराए, तो इस बिल को प्राथमिकता दी जाएगी। यही बिंदु विपक्ष को सबसे ज्यादा अस्वीकार्य लगा।


