बीकानेर के लिए गर्व का एक खास अवसर सामने आया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम Mann Ki Baat में शहर के ऐतिहासिक Abhay Jain Granthalaya का उल्लेख करते हुए इसकी खुलकर सराहना की।
400 साल पुरानी धरोहर का जिक्र
प्रधानमंत्री ने ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत इस ग्रंथालय में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों को भारत की समृद्ध विरासत का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने खासतौर पर ताम्रपत्र (कॉपर प्लेट) पर लिखी करीब 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों का उल्लेख करते हुए इनके संरक्षण और डिजिटलीकरण को बेहद जरूरी बताया।
शोधकर्ताओं के लिए बड़ा केंद्र
करीब 100 वर्ष पुराने इस ग्रंथालय में
- डेढ़ लाख से अधिक पुस्तकें
- हस्तलिखित पांडुलिपियां
- दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज
सुरक्षित रखे गए हैं। यही वजह है कि यह स्थान देश-विदेश के शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
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आधुनिक तकनीक से संरक्षण
आज Abhay Jain Granthalaya केवल पारंपरिक संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी तेजी से किया जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी इस अमूल्य ज्ञान-संपदा का लाभ मिल सकेगा।
एक सदी पुरानी विरासत
इस ग्रंथालय की स्थापना लगभग एक सदी पहले अग्रचंद नाहटा ने अपने भाई अभयराज नाहटा की स्मृति में की थी। तब से नाहटा परिवार इस धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर करता आ रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली नई पहचान
प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में उल्लेख किए जाने के बाद बीकानेर के इस ऐतिहासिक ग्रंथालय को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। यह पहल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।

