राजस्थान में बढ़ते ऊर्जा दबाव और सीमित गैस आपूर्ति को देखते हुए राज्य सरकार ने कमर्शियल एलपीजी वितरण के लिए नई नीति लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध गैस संसाधनों का संतुलित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब कमर्शियल एलपीजी गैस की सप्लाई अलग-अलग श्रेणियों में बांटी गई है। यह निर्णय वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
नई गैस वितरण प्रणाली कैसे काम करेगी
सरकार ने कमर्शियल उपभोक्ताओं को चार प्रमुख कैटेगिरी में विभाजित किया है—100%, 60%, 50% और 40%। इन श्रेणियों के आधार पर गैस की आपूर्ति तय की जाएगी।
100 प्रतिशत गैस आपूर्ति
इस श्रेणी में वे सेवाएं शामिल हैं जो सीधे आमजन के जीवन और जरूरी सुविधाओं से जुड़ी हैं:
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- सरकारी और निजी अस्पताल
- स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और छात्रावास
- सरकारी कार्यालयों की कैंटीन, पुलिस और सैन्य मेस
- मिडडे मील योजना और पंजीकृत धर्मार्थ संस्थाएं
60 प्रतिशत गैस आपूर्ति
- होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे
- सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें
- डेयरी सेक्टर (सरकारी और निजी)
50 प्रतिशत गैस आपूर्ति
- मंदिर और धार्मिक स्थलों के रसोईघर
- मैरिज गार्डन, पैलेस और कैटरिंग सेवाएं
- धार्मिक आयोजन और छोटे व्यवसायिक उपभोक्ता
40 प्रतिशत गैस आपूर्ति
- थोक और पैक्ड सप्लाई से जुड़े उद्योग
इसके अलावा रेहड़ी-पटरी संचालकों और प्रवासी श्रमिकों को एक बार में अधिकतम दो सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
खपत के आधार पर तय होगा कोटा
नई व्यवस्था में गैस आवंटन का आधार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक की औसत खपत को बनाया गया है। किसी जिले में यदि गैस कोटा बचता है, तो जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति स्थानीय जरूरत के अनुसार उसका पुनर्वितरण करेगी।
पंजीकरण और PNG कनेक्शन अनिवार्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब बिना पंजीकरण कोई भी उपभोक्ता कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं ले सकेगा। जिन क्षेत्रों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को अनिवार्य रूप से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा।
जब तक पाइपलाइन कनेक्शन उपलब्ध नहीं होता, तब तक ही एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे। इससे दीर्घकाल में सिलेंडर पर निर्भरता कम करने की योजना है।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने नई नीति के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सीमित संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने और जरूरी क्षेत्रों—खासतौर पर स्वास्थ्य और शिक्षा—को बिना बाधा सेवाएं देने के लिए उठाया गया है।

