बीकानेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के तहत बड़े स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 46 सीमावर्ती गांवों में प्रत्येक गांव के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य प्रस्तावित किए जा सकेंगे। वहीं मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के तहत भी 15 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे।
इन योजनाओं को लेकर मंगलवार शाम कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार की जाएं।
कलेक्टर ने प्रस्तावों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पीएचसी स्थापना, स्कूलों में स्मार्ट क्लास, पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण, मुख्य मार्गों से गांवों तक बेहतर संपर्क, तथा ऑफ-ग्रिड सोलर प्रोजेक्ट्स को शामिल करने पर जोर दिया।
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बैठक में अंशुमान सिंह भाटी ने सुझाव दिया कि विकास कार्यों में विभिन्न कंपनियों के सीएसआर फंड का भी उपयोग किया जाए, जिससे योजनाओं को और गति मिल सके।
इस दौरान जिला परिषद के सीईओ सोहन लाल ने जानकारी दी कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (द्वितीय चरण) के तहत सीमावर्ती गांवों में आजीविका, सड़क, आवास, ऊर्जा, दूरसंचार, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के लिए देशभर में 6 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और वर्ष 2024-28 के लिए चार वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के तहत 10 करोड़ और 5 करोड़ रुपये की दो अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से कुल 15 करोड़ रुपये के प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजे जाएंगे।
बैठक में डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, एसीईओ दिलीप कुमार, अधिशासी अभियंता अशोक गहलोत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

