शहर में आगामी नहरबंदी को लेकर एक बार फिर पेयजल संकट के हालात बनने की आशंका है। पिछले चार वर्षों की तरह इस बार भी लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि तीसरा जलाशय तैयार हो चुका है, लेकिन इस साल भी उसका लाभ मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।
मुख्य समस्या यह है कि जलाशय में भरने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, यदि पानी उपलब्ध हो भी जाए तो उसे जलाशय से निकालकर फिल्टर करने की व्यवस्था अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।
बीकानेर शहर के लिए वर्ष 2052 तक के पेयजल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। यह प्रोजेक्ट 2024 तक पूरा होना था, जबकि नहरबंदी का कार्य 2023 तक समाप्त होना प्रस्तावित था। लेकिन दोनों ही कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे नहीं हो सके, जिसके चलते स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार अगले वर्ष से 60 दिनों की नहरबंदी की व्यवस्था समाप्त हो सकती है और तब तक नए ढांचे के पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। ऐसे में अगले साल राहत मिलने की संभावना है, लेकिन फिलहाल इस साल स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
- Advertisement -
नए प्रोजेक्ट के तहत शहर में 15 नई पानी की टंकियां बनाई जानी थीं, ताकि टेल एरिया में रहने वाले लोगों को राहत मिल सके। लेकिन अब तक केवल 6 टंकियां ही पूरी तरह बनकर तैयार हो पाई हैं और उनका आपस में समन्वय भी हो चुका है। इन टंकियों से करीब 12 टेल एरिया में कुछ हद तक समस्या का समाधान हुआ है।
इसके बावजूद शहर के लगभग 18 टेल एरिया ऐसे हैं, जहां नहरबंदी के दौरान पेयजल संकट गहराने की पूरी संभावना बनी हुई है। विभागीय देरी और अधूरी तैयारियों के चलते आमजन को इस साल भी पानी की किल्लत झेलनी पड़ सकती है।

