मार्च की शुरुआत में ही बढ़े गर्मी के तेवर
देश में मार्च के पहले ही सप्ताह में गर्मी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़कर 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति सामान्य से अलग है क्योंकि आमतौर पर इतनी गर्मी अप्रैल या मई में देखने को मिलती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस साल गर्मी पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा तीखी हो सकती है।
कई राज्यों में लू चलने की संभावना
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार हिमाचल प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र के कुछ इलाकों में रविवार को सामान्य से अधिक तेज लू चल सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान में 10 और 11 मार्च को गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में 8 से 10 मार्च के बीच अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है। हालांकि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 9 से 11 मार्च के बीच हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
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मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के तापमान में फिलहाल ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं जताई गई है, लेकिन गर्मी का असर धीरे-धीरे यहां भी बढ़ सकता है।
महाराष्ट्र में तापमान 40 डिग्री के पार
पिछले दो दिनों में देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ा है। महाराष्ट्र के अमरावती में अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मुंबई में पारा 38.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसी तरह राजस्थान सहित कई राज्यों में भी तापमान सामान्य से अधिक रिकॉर्ड किया गया है।
पहले भी गर्म रहा है मार्च
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में मार्च का महीना लगातार गर्म होता जा रहा है। वर्ष 2022 का मार्च पिछले 122 वर्षों में सबसे गर्म रहा था, जब औसत अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
इसके बाद 2023 और 2024 में भी मार्च के शुरुआती दिनों में ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा था। वहीं 2025 में मार्च के अंत तक कई स्थानों पर तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चिंता
वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण है। हाल ही में प्रकाशित एक शोध के अनुसार वर्ष 2015 के बाद ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है।
अध्ययन में बताया गया है कि पृथ्वी का औसत तापमान अब लगभग 0.35 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है, जो पिछले दशकों की तुलना में कहीं अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में चरम मौसम की घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।
मौसम के बदलते पैटर्न पर वैज्ञानिकों की नजर
वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि हवा में मौजूद एरोसोल कणों की कमी भी तापमान बढ़ने का एक कारण बन रही है। पहले ये कण सूर्य की कुछ किरणों को अंतरिक्ष में वापस भेज देते थे, जिससे पृथ्वी तक पहुंचने वाली गर्मी कम हो जाती थी। लेकिन अब इनकी मात्रा घटने से सूर्य की गर्मी सीधे धरती तक पहुंच रही है।
इसके साथ ही दुनिया के कुछ हिस्सों को जलवायु परिवर्तन के ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है और चरम मौसम की घटनाएं ज्यादा देखने को मिल रही हैं।

