असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज
असम में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है। चुनाव नजदीक आते ही सहयोगी दलों ने अपने-अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगियों को संतुष्ट रखते हुए गठबंधन को एकजुट बनाए रखना है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ सहयोगी दल कई सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ ही उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इससे चुनावी रणनीति और सीटों के तालमेल को लेकर नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।
सहयोगी दलों ने बढ़ाया दबाव
राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा विकास के मुद्दों को लेकर चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं। वहीं गठबंधन में शामिल असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) सीटों की संख्या को लेकर अपनी मांगें रख रहे हैं।
असम गण परिषद इस बार पिछले चुनाव की तुलना में अधिक सीटों की मांग कर रही है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसका आधार मजबूत है, इसलिए उसे गठबंधन में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
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मुख्यमंत्री ने ‘फ्रेंडली फाइट’ से किया इनकार
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सहयोगी दलों के साथ ‘फ्रेंडली फाइट’ की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का दौर शुरू हो चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि 9 या 10 मार्च तक सीटों के फार्मूले पर सहमति बन सकती है।
सरमा का कहना है कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी दलों के साथ संवाद जारी है और जल्द ही अंतिम फैसला सामने आएगा।
पिछले चुनाव का प्रदर्शन
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में असम गण परिषद ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय पार्टी ने कुल 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से 26 सीटों पर उसने अकेले चुनाव लड़ा जबकि 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला हुआ था। उस चुनाव में एजीपी को 9 सीटों पर जीत मिली थी।
भाजपा और असम गण परिषद के बीच राजनीतिक गठबंधन 2014 से जारी है और दोनों दल कई चुनावों में साथ मिलकर मैदान में उतरे हैं।
यूपीपीएल ने भी दिखाई राजनीतिक ताकत
विधानसभा चुनाव से पहले यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह कुल 21 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र में हैं जबकि 6 सीटें इसके बाहर की हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के सामने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूपीपीएल के बीच दूरी कम करने की चुनौती भी है। दोनों दलों ने साफ संकेत दिए हैं कि वे साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं।
विपक्ष भी कर रहा रणनीति तैयार
सत्तारूढ़ गठबंधन में चल रही हलचल के बीच विपक्ष भी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही चार प्रमुख विपक्षी दलों ने संयुक्त अभियान चलाने पर सहमति जताई है।
हालांकि विपक्षी दलों के सामने भी सीट बंटवारे का मुद्दा चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि दोनों खेमों में सीटों को लेकर सहमति बनती है या फिर राजनीतिक समीकरण और जटिल होते हैं।

