बीकानेर। सांसोलाव तालाब क्षेत्र स्थित पहाड़ी बाबा शिव मंदिर के पीछे करमीसर रोड पर वर्ष 2015 में हुए हमले के चर्चित मामले में अदालत ने फैसला सुना दिया है। सेशन कोर्ट के न्यायाधीश अनुभव सिडाना ने मुख्य आरोपी रामरतन को दोषी ठहराया, जबकि सह-आरोपी संजय, सुनील और ईमीचंद को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
यह था मामला
24 अगस्त 2015 की रात करीब 11:30 बजे परिवादी शंकरलाल अपने साथियों के साथ मंदिर में अभिषेक कर लौट रहे थे। आरोप के अनुसार, रास्ते में रामरतन और अन्य लोगों ने उन पर हथियारों से हमला किया। शंकरलाल के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया गया, जबकि महादेव के हाथ में चोट लगी, जिसे अस्थिभंग बताया गया। इस संबंध में नयाशहर थाने में मामला दर्ज किया गया था।
साक्ष्यों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की। कोर्ट ने पाया कि तीनों सह-आरोपियों के नाम प्रारंभिक एफआईआर में नहीं थे और उनके खिलाफ ठोस व स्वतंत्र साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। मेडिकल साक्ष्यों में भी खामियां पाई गईं, जैसे एक्स-रे करने वाले रेडियोलॉजिस्ट को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। इन आधारों पर तीनों को बरी कर दिया गया।
वहीं, अदालत ने माना कि रामरतन घटनास्थल पर मौजूद था और उसने रास्ता रोककर मारपीट की। हालांकि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं पाए गए।
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रास्ते को लेकर था विवाद
सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि विवाद मंदिर जाने वाले मार्ग को लेकर था। राजस्व रिकॉर्ड में विवादित रास्ता अधिकृत मार्ग के रूप में दर्ज नहीं था और मंदिर तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक मुख्य रास्ता उपलब्ध था।
करीब दस वर्ष पुराने इस मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी को साधारण मारपीट और रास्ता रोकने का दोषी माना है।

