बीकानेर। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गैंगस्टरों की धमकियों का मुद्दा मंगलवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। शून्यकाल के दौरान निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने व्यापारियों, डॉक्टरों और आम नागरिकों को मिल रही फिरौती की धमकियों को गंभीर कानून-व्यवस्था का संकट बताया।
विदेश और जेल से मिल रहीं धमकियां
विधायक भाटी ने सदन में कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि विदेशों में बैठे गैंगस्टर और जेल में बंद अपराधी इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में व्यापारियों से वसूली के लिए व्हाट्सएप कॉल और वॉइस नोट के माध्यम से धमकियां दी जा रही हैं, जिससे भय का माहौल बना हुआ है।
उनका कहना था कि यह समस्या अब केवल बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे दुकानदार भी इसके दायरे में आ गए हैं। “अगर किसी परचून की दुकान का काम भी ठीक चल रहा है, तो उसे भी धमकी मिल रही है,” उन्होंने कहा।
व्यापारियों में दहशत का माहौल
भाटी ने सदन में बताया कि जिन्हें धमकी मिलती है, वे अपने प्रतिष्ठान तक जाने से डरते हैं। कई परिवारों के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पूरा परिवार मानसिक तनाव में घरों तक सीमित हो जाता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा सुरक्षा के तौर पर दो जवान तैनात कर देने से समस्या का समाधान नहीं हो रहा। गैंगस्टर फोन कर यह तक कह देते हैं कि “ये दो पुलिसकर्मी आपको क्या बचा लेंगे?” इससे अपराधियों के मनोबल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय नेटवर्क पर उठे सवाल
विधायक ने आशंका जताई कि इन गैंगस्टरों को स्थानीय स्तर पर किसी नेटवर्क से मदद मिल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंच रही है। इस पर गंभीर जांच की आवश्यकता है।
यूपी-बिहार मॉडल की तर्ज पर कार्रवाई की मांग
उत्तर प्रदेश और बिहार का उल्लेख करते हुए भाटी ने कहा कि वहां की तर्ज पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े गैंगस्टर के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, तो बाकी अपराधियों तक स्पष्ट संदेश जाएगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि गैंगस्टर नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, साइबर मॉनिटरिंग को मजबूत किया जाए और संगठित अपराध के खिलाफ कठोर रणनीति बनाई जाए।
कानून-व्यवस्था पर बढ़ती चिंता
राजस्थान में हाल के समय में व्यापारियों को मिल रही धमकियों ने कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा में उठा यह मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

