कोटा। शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुंची एक अभ्यर्थी को कथित रूप से प्रवेश से रोके जाने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। परीक्षा से वंचित रहने के बाद छात्रा ने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
यह मामला पिछले महीने आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसका आयोजन Rajasthan Staff Selection Board द्वारा किया गया था।
सेंटर पर रोकी गई अभ्यर्थी
जानकारी के अनुसार बूंदी जिले के हिंडोली क्षेत्र की रहने वाली अभ्यर्थी अलीशा का परीक्षा केंद्र कोटा शहर के महावीर नगर एक्सटेंशन स्थित एक निजी स्कूल में निर्धारित किया गया था। निर्धारित तिथि को वह समय पर परीक्षा केंद्र पहुंची। उसके पास प्रवेश पत्र और पहचान से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे।
अभ्यर्थी का आरोप है कि वह हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुंची थी, लेकिन प्रवेश द्वार पर ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने उसे हिजाब हटाने के लिए कहा। उसने इसे अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए हिजाब उतारने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया और वह परीक्षा से वंचित रह गई।
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कोर्ट में रखा गया पक्ष
छात्रा की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और समान अवसर के अधिकार से जुड़ा है। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि हिजाब केवल सिर को ढकता है, चेहरा पूरी तरह खुला रहता है और पहचान सत्यापन में कोई बाधा नहीं आती। ऐसे में प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं था।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि छात्रा को पुनः परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए तथा भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि सुरक्षा मानकों और अभ्यर्थियों के अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।
हाईकोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से जवाब मांगा है। अदालत ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस प्रकरण के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में ड्रेस कोड, धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
अब सभी की नजर अदालत के अगले आदेश पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि छात्रा को दोबारा परीक्षा का अवसर मिलेगा या नहीं।

