श्रीनगर। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि इस संबंध में प्रक्रिया जारी है और उचित समय पर सकारात्मक निर्णय सामने आ सकता है। उन्होंने इस विषय को संवेदनशील बताते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ रही है।
प्रक्रिया पर सरकार की प्रतिबद्धता
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मेघवाल ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही लोकसभा में आश्वस्त कर चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनका अधिकार मिलेगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार की मंशा स्पष्ट है और राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
मेघवाल श्रीनगर में टेली-लॉ (DISHA) योजना से जुड़ी क्षेत्रीय कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान उनकी राज्य के दर्जे को लेकर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र की ओर से मिले संकेतों पर सावधानीपूर्ण आशा जताई। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लगातार केंद्र के संपर्क में है, लेकिन प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लोग लंबे समय से सकारात्मक खबर का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि अब निर्णय में ज्यादा देरी नहीं होगी।
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राजनीतिक और संवैधानिक महत्व
जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 में विशेष दर्जे से मुक्त कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। तब से राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की ओर से मांग उठती रही है। केंद्र सरकार की ताजा टिप्पणी को इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल होने से प्रशासनिक संरचना में बदलाव आएगा और स्थानीय राजनीतिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संसद की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
आगे क्या?
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद यह संकेत मिल रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं। यदि निर्णय सकारात्मक आता है, तो यह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

