बीकानेर। प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के कार्मिकों की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन स्वीकृत न होने के मामलों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग के निदेशक के पत्र के आधार पर सभी संयुक्त निदेशक, जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारम्भिक शिक्षा तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्यों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
नियम और जिम्मेदारी
राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम-63 के अनुसार, किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्ति दिनांक से छह माह पूर्व पेंशन प्रकरण पेंशन विभाग को भेजना अनिवार्य है। वहीं, नियम-69 के तहत यदि बिना किसी युक्तियुक्त कारण के सेवानिवृत्ति के 60 दिनों के भीतर पेंशन स्वीकृत और भुगतान नहीं होता है, तो देरी के लिए उत्तरदायित्व संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर तय होगा और देरी से भुगतान पर ब्याज वसूल किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में निर्देश
मुख्य सचिव ने 29 जनवरी 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सेवानिवृत्त होने वाले सभी राज्य कर्मचारियों के पेंशन भुगतान आदेश एवं समस्त पेंशन परिलाभ उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि से पहले स्वीकृत किए जाएं। मुख्य सचिव ने पेंशन लाभ की स्वीकृति में देरी को गंभीर लापरवाही माना है।
आगामी प्रक्रिया
वित्तीय सलाहकार, प्रारम्भिक शिक्षा एवं राज (प्रा.शि.) ने निर्देश दिए हैं कि सभी अधीनस्थ कार्यालयाध्यक्ष आगामी छह माह में सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के पेंशन प्रकरण समय पर तैयार करें और उन्हें पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग को भेजें। साथ ही, पेंशन भुगतान आदेश कम से कम तीन माह पहले जारी करना सुनिश्चित किया जाए।
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सरकार का संदेश
राज्य सरकार ने साफ किया है कि पेंशन प्रकरणों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि देरी होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से पेंशन स्वीकृति में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

