बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ चल रहा आंदोलन लगातार मजबूती पकड़ता जा रहा है। 2 फरवरी से विश्नोई धर्मशाला के सामने शुरू हुआ महापड़ाव रविवार को छठे दिन भी जारी रहा। सुबह से देर रात तक पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक संगठनों के लोग एक ही मांग को लेकर डटे हुए हैं—खेजड़ी की कटाई तत्काल रोकी जाए और इसके संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
दूर-दराज से पहुंच रहे पर्यावरण प्रेमी
महापड़ाव स्थल पर रोजाना लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीकानेर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों और अन्य जिलों से भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। धरनास्थल पर खेजड़ी को बचाने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और संवाद भी लगातार हो रहे हैं।
कांग्रेस का पैदल मार्च, आंदोलन को समर्थन
इसी क्रम में रविवार को बीकानेर कांग्रेस ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। रतन बिहारी पार्क से पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला और यशपाल गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च किया और महापड़ाव स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई।
इस मौके पर जिया उर रहमान, गजेन्द्र साखला, निवर्तमान पार्षद प्रफुल्ल हाटीला, ब्लॉक अध्यक्ष कमल साध, मुकेश जोशी, सुनील सारस्वत, राहुल जादूसंगत, गिरधर जोशी, सुमित बिस्सा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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“पर्यावरण के लिए हर लड़ाई में साथ” – डॉ. कल्ला
महापड़ाव को संबोधित करते हुए डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा कि वे स्वयं पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर रहे हैं और खेजड़ी जैसे जीवनदायी वृक्ष की रक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने संघर्ष समिति को आश्वस्त किया कि जहां भी सहयोग की आवश्यकता होगी, कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी।
कानून नहीं बना तो सड़क पर उतरेगी कांग्रेस
यशपाल गहलोत ने संघर्ष समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार ने समय रहते खेजड़ी संरक्षण को लेकर कानून नहीं बनाया, तो कांग्रेस को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण से जुड़े इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
संघर्ष समिति ने दोहराया कि जब तक खेजड़ी की कटाई पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक महापड़ाव जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन और संस्कृति की पहचान है।

