अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के हालिया बयानों के बाद भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों में दावा किया गया कि भारत रूस से तेल आयात बंद करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अब इस पूरे मामले पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्थिति स्पष्ट की है।
रूसी तेल पर फैसला कौन लेगा?
शनिवार को जब पीयूष गोयल से सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा, तो उन्होंने साफ कहा कि यह विषय विदेश नीति से जुड़ा है और इस पर आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से दी जाएगी। उन्होंने किसी भी तरह की अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
गोयल के इस बयान को यह संकेत माना जा रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत किसी भी बाहरी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेता, बल्कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर कदम उठाता है।
व्हाइट हाउस का दावा क्या था?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया था कि भारत ने रूस से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात कम करने या रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही यह भी कहा गया कि भारत भविष्य में अमेरिका से अधिक ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा।
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इसके अलावा, दोनों देशों के बीच अगले दस वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की बात भी सामने आई थी।
किसानों और घरेलू बाजार पर सरकार का रुख
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि नए व्यापार ढांचे में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उनके अनुसार, भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात की सुविधा मिलेगी, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में किसी तरह की अतिरिक्त टैरिफ छूट नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ चुनिंदा उत्पादों जैसे डिस्टिलर ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS), वाइन और स्पिरिट के लिए अमेरिकी कंपनियों को बाजार में प्रवेश दिया गया है, लेकिन न्यूनतम आयात मूल्य जैसी शर्तें लागू रहेंगी।
MSME और शिल्पकारों को लेकर आश्वासन
मंत्री ने दो टूक कहा कि इस समझौते से भारत के MSME सेक्टर, कारीगरों और शिल्पकारों को कोई नुकसान नहीं होगा। उनका दावा है कि अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी।

