बीकानेर। छतरगढ़ थाना क्षेत्र से जुड़े 18 साल पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। बीकानेर की अदालत ने आरोपी हुसैन खां को दोषी ठहराया, लेकिन छह माह की जेल और 500 रुपए जुर्माने की सजा हटाकर उसे परिवीक्षा का लाभ दे दिया।
मामला तब का है जब पीड़िता ने अपने पिता के साथ मिलकर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी शादी लगभग 25 साल पहले मुस्लिम रीति-रिवाज से हुसैन खां से हुई थी। शादी में पिता ने दहेज और स्त्रीधन दिया, लेकिन इसके बाद प्रताड़ना शुरू हो गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष ने खाना-पीना बंद कर दिया और मारपीट के साथ मानसिक उत्पीड़न भी किया।
पीड़िता के अनुसार, समझाने के लिए कई बार पंचायत हुई और उसके पिता ने नकद राशि, तीन गायें और 20 बकरियां भी दीं, लेकिन प्रताड़ना जारी रही। 8 अगस्त 2007 को आरोपियों ने पीड़िता और उसके सात बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया और स्त्रीधन के रूप में एक लाख रुपए की मांग की। इस मामले में छतरगढ़ थाने में FIR दर्ज की गई।
2017 में न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहनलाल ने आरोपी हुसैन खां को छह माह का कारावास और 500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी ने इसके बाद सेशन कोर्ट में अपील की। अपील में उसने दोषसिद्धि पर बहस नहीं की, बल्कि सजा को कम करने की मांग की। उसने कहा कि मामला 2007 से चल रहा है, और इस लंबे समय के दौरान वह मानसिक तनाव झेल रहा है।
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सेशन कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और सजा की अधिकतम सीमा सात साल से कम है। इसलिए आरोपी को जेल भेजने की बजाय परिवीक्षा का लाभ देना न्यायोचित माना गया। अपील में आरोपी की पैरवी अधिवक्ता अनवर अली सैयद और वाहिद अली सैयद ने की।

