बीकानेर। सोनगिरी कुआं इलाके में 2017 में हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में पीड़ित परिवार द्वारा दायर 30 लाख रुपये मुआवजा दावा न्यायालय ने खारिज कर दिया है। बीकानेर की सिविल कोर्ट के न्यायाधीश अश्वनी विज ने कहा कि वादी पक्ष ने पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद कोई गवाह या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया, इसलिए दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस घटना में सात लोगों की मौत हुई थी। प्रतिवादी कैलाशचंद और उनके भाई महेन्द्र पारीक पर आरोप था कि उन्होंने घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध रूप से पटाखों के लिए विस्फोटक पदार्थ रखा और फैक्ट्री संचालित की। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को इसकी शिकायत की थी और फैक्ट्री बंद कराने की मांग की थी।
घटना 7 जुलाई 2017 को सुबह लगभग 10 बजे हुई। अचानक फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हुआ और इसके बाद बारूद में आग फैल गई। आसपास के कई मकान और संपत्ति ध्वस्त हो गई। हादसे में सात लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए।
पीड़ित पक्ष ने बताया कि मृतक विजय कुमार फैक्ट्री में मजदूरी करता था और उसका मासिक आमदनी 15,000 रुपए थी। परिवार ने यह दावा किया कि विजय कुमार परिवार का एकमात्र सहारा था, इसलिए 30 लाख रुपये मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज की मांग की।
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प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में कहा कि उनके पास ‘गणेश फायर वर्क्स’ के नाम से वैध लाइसेंस था। यह हादसा दुर्घटनावश हुआ और फॉरेन्सिक रिपोर्ट के अनुसार विस्फोटक से नहीं बल्कि पड़ोसी के घर में गैस सिलेंडर फटने के कारण आग फैली थी।
कोर्ट ने कहा कि वादी पक्ष को गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने के पर्याप्त मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने कोई प्रमाण नहीं दिया। इस कारण घातक दुर्घटना अधिनियम के तहत दायर वाद को खारिज कर दिया गया। प्रतिवादी की पैरवी अधिवक्ता प्रेमनारायण हर्ष ने की।

