Bikaner Mahapadav: पर्यावरण आंदोलन को लेकर शहर में बढ़ी हलचल
बीकानेर में दो फरवरी को प्रस्तावित महापड़ाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस बड़े आंदोलन में जिले के साथ-साथ पश्चिमी राजस्थान के कई अन्य जिलों से लोगों के पहुंचने की संभावना है। खेजड़ी बचाओ-प्रकृति आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता अंतिम चरण की व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।
यह आंदोलन अपनी तरह का पहला आयोजन माना जा रहा है, जिसमें लोग स्वेच्छा से और अपने खर्च पर शामिल होने के लिए बीकानेर पहुंचेंगे।
2 फरवरी को बीकानेर बंद का आह्वान
महापड़ाव को देखते हुए 2 फरवरी को बीकानेर बंद की घोषणा की गई है। पर्यावरण संघर्ष समिति ने शहरों, गांवों और ढाणियों तक पहुंचकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया है। आंदोलन की रणनीति और कार्यक्रम रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है।
पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में विशाल जनसभा
दो फरवरी को सुबह से ही पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद दोपहर पश्चात बिश्नोई धर्मशाला के सामने अनिश्चितकालीन महापड़ाव की शुरुआत होगी।
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महापड़ाव के दौरान
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‘खेजड़ी की बेटी’ विषय पर नाट्य मंचन
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भजन संध्या
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रात्रि जागरण
जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
साधु-संत और 36 कौम की भागीदारी
महापड़ाव का शंखनाद मुकाम पीठ के पीठाधीश्वर रामानंद महाराज के सानिध्य में किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत, 36 कौम के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी शामिल होंगे।
इसके अलावा मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भी संभावित बताई जा रही है।
50 हजार लोगों के जुटने का अनुमान
आयोजकों के अनुसार, जनसभा और महापड़ाव में करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। आंदोलन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है और लगातार गुप्त सूचनाएं जुटाई जा रही हैं।
आंदोलन को मिल रहा संगठनों का समर्थन
पूर्व पार्षद मनोज बिश्नोई ने बताया कि
2 फरवरी को पूरा बीकानेर बंद रहेगा और यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। वकील समुदाय सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने आंदोलन को खुला समर्थन दिया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस बार संघर्ष आर-पार का होगा।

