बंगला नगर मंडल कांग्रेस समिति के तत्वावधान में मनरेगा को लेकर श्रमिकों और ग्रामीण नागरिकों की एक जागरूकता सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के मूल स्वरूप को कमजोर करने का आरोप लगाया।
डॉ. कल्ला ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना के नाम में महात्मा गांधी का उल्लेख नहीं होने के बावजूद इसके संक्षिप्त नाम को लेकर गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल नाम परिवर्तन ही नहीं किया गया, बल्कि इस योजना के अंतर्गत पहले मिलने वाला ‘राइट टू वर्क’ यानी काम पाने का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया है। साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय हिस्सेदारी में बदलाव करते हुए केंद्र द्वारा दी जाने वाली राशि को कम कर दिया गया है, जिससे कई राज्यों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. कल्ला ने कहा कि पहले ग्राम सभाओं को यह अधिकार था कि वे तय करें कि ग्रामीण क्षेत्रों में कौन-कौन से कार्य कराए जाएंगे, लेकिन अब यह अधिकार भी केंद्र सरकार अपने हाथ में ले रही है। उन्होंने इन बदलावों का विरोध करते हुए मनरेगा को बचाने के लिए जनजागरण अभियान चलाने और पोस्टकार्ड के माध्यम से विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया।

