बीकानेर। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब प्रत्येक गुरुवार को छात्र निजी स्कूल यूनिफॉर्म में उपस्थित होंगे, जबकि शिक्षक और अन्य स्टाफ सदस्य हथकरघा या स्थानीय, गरिमामय परिधान पहनकर विद्यालय आएंगे।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय पहचान के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाना है। इसके साथ ही स्थानीय हथकरघा उद्योग और पारंपरिक वस्त्रों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट (आईएएस) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह कदम राज्य सरकार के सांस्कृतिक संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य के तहत लागू किया गया है। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था सभी स्कूलों में समान रूप से पालन की जाएगी।
शिक्षा निदेशालय ने समस्त संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ विद्यालयों में इन दिशा-निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करें। साथ ही, विद्यालयों द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी ई-मेल के माध्यम से निदेशालय को भेजी जाएगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों की समझ बढ़ेगी और उन्हें अपने क्षेत्रीय हस्तशिल्प एवं परंपराओं के महत्व का अनुभव होगा।

