बीकानेर। मरुस्थलीय संस्कृति, विरासत और आतिथ्य का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 का शुभारंभ शुक्रवार को भव्य हेरिटेज वॉक के साथ हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन शहर की गलियों, हवेलियों और मंदिर प्रांगणों में बीकानेरी परंपरा जीवंत नजर आई। देश-विदेश से आए सैलानी, स्थानीय नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी इस सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा बने।
उत्सव की शुरुआत नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर से हुई, जहां से हेरिटेज वॉक रामपुरिया हवेलियों तक निकली। इस दौरान बीकानेर की ऐतिहासिक स्थापत्य कला, लोक जीवन, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान की झलक ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बड़ी पगड़ियों में सजे युवक, मूंछों पर ताव देते चेहरे और तांगों पर सवार अधिकारी-सैलानी शहर की पुरानी शान को दर्शा रहे थे।
स्वाद, संगीत और परंपरा का संगम
हेरिटेज वॉक के दौरान भुजिया, घेवर, जलेबी और कचौड़ी बनाने की पारंपरिक विधियों का लाइव प्रदर्शन किया गया। इन व्यंजनों को बनते देख सैलानी उत्साह से भर उठे। रामपुरिया हवेलियों के समीप यात्रा का समापन हुआ, जहां पंडित नारायण दास रंगा और उनकी टीम ने हवेली संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। शेखावाटी की चंग टीम और साहित्यकार सुधा आचार्य के शंखनाद ने वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
विरासत संरक्षण का संदेश
हेरिटेज वॉक का शुभारंभ केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास और जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ ने की। केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव बीकानेर की पहचान को वैश्विक स्तर पर और सशक्त करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हजार हवेलियों वाले इस शहर की विरासत को सुरक्षित रखने में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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आत्मीय स्वागत और बीकानेरी अपनायत
पूरे मार्ग में स्थानीय नागरिकों ने फूलों की वर्षा, मालाएं पहनाकर और पारंपरिक अभिवादन के जरिए अतिथियों का स्वागत किया। सैलानी हवेलियों और सजे-धजे रास्तों की पृष्ठभूमि में सेल्फी लेते नजर आए। बीकानेर की इस गर्मजोशी ने विदेशी मेहमानों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस दौरान मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं पारंपरिक मिठाइयां बनाईं और स्थानीय स्वाद का आनंद लिया।
जाजम पर पावणों की मान-मनुहार
जिला उद्योग संघ के तत्वावधान में आयोजित मान-मनुहार कार्यक्रम में विदेशी पावणों ने जाजम पर बैठकर ठेठ राजस्थानी भोजन का अनुभव लिया। बाजरे की रोटी, राबड़ी, खीचड़ा, सांगरी की सब्जी और पापड़-फळी उनके लिए यादगार पल बने। साथ ही गोबर से बने उत्पाद, ऊनी शॉलें, हस्तनिर्मित वस्तुएं और बड़ी-पापड़ की स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
धरणीधर मैदान में रहा सीमित उत्साह
पहले दिन का अंतिम कार्यक्रम धरणीधर मैदान में हुआ, जहां मिस्टर बीकाणा और मिस मरवण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। हालांकि दर्शकों की संख्या अपेक्षा से कम रही। इसके बाद ‘बीकाणा री आवाज’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
आज के प्रमुख आयोजन
उत्सव के दूसरे दिन सुबह संसोलाव तालाब के किनारे ‘करें योग, रहें निरोग’ अभियान के तहत फ्लो योगा अभ्यास होगा। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में ‘ऊंटां री बातां’ कार्यक्रम के अंतर्गत ऊंट नृत्य, साज-सज्जा, फर कटिंग और दौड़ आयोजित की जाएंगी। डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में ऊंटों के इतिहास और विरासत पर आधारित कला प्रदर्शनी लगेगी। शाम को ‘बेस्ट ऑफ राजस्थान फोक नाइट’ में लोक कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।

