कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए इसे ‘डेड इकॉनमी’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि आमतौर पर जीडीपी ग्रोथ को साल की शुरुआत और अंत में इस तरह प्रस्तुत किया जाता है, जिससे तस्वीर बेहतर दिखाई दे। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि यदि देश की अर्थव्यवस्था वास्तव में मजबूत है, तो मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में केंद्र और राज्यों के बीच 90:10 के फंडिंग अनुपात को घटाकर 60:40 क्यों किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, बेरोजगारी गंभीर समस्या बनी हुई है और छोटे व मझोले उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकारी दावों के मुताबिक अर्थव्यवस्था इतनी अच्छी है, तो आम लोगों की हालत दिन-ब-दिन खराब क्यों हो रही है। उनके अनुसार सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था आम नागरिकों के लिए काम करना बंद कर चुकी है।
आगामी बजट सत्र को लेकर भी कांग्रेस सांसद ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि हर बजट के दौरान जनता से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया जाता। चाहे बजट किसी भी दिन पेश किया जाए, असली सवाल यह है कि सरकार अपने वादों को जमीन पर कब उतारेगी।
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इसके अलावा प्रमोद तिवारी ने ‘विकसित भारत – जी राम जी’ योजना को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में पहले मौजूद गारंटी को खत्म कर दिया गया है। उनका कहना था कि मनरेगा में किए गए बदलावों के जरिए न केवल गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि अब स्थानीय जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की व्यवस्था भी कमजोर कर दी गई है। अब योजनाओं का क्रियान्वयन ऊपर से तय किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर समस्याएं बढ़ेंगी।
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुई पथराव की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया। उन्होंने कहा कि यदि हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई जरूरी थी, तो प्रशासन को पहले स्थानीय लोगों से संवाद करना चाहिए था और उन्हें पूरी जानकारी देनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई रात के समय क्यों शुरू की गई और दिन में खुले तौर पर क्यों नहीं की गई।

