बीकानेर। अजमेर की टाडा कोर्ट ने 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट मामले में अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है. इसके अलावा दो आरोपियों इरफ़ान और हमीदुद्दीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. टुंडा फिलहाल अजमेर की जेल में बंद है.
अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1993 में कोटा, लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुंबई की ट्रेनों में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे और टुंडा इन्हीं मामलों में आरोपी था. सरकारी वकील से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि टुंडा को किस आधार पर बरी किया गया है, इस पर फैसला देखने के बाद टिप्पणी की जाएगी.
मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले के बाद भारत ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार से टुंडा और 19 अन्य आतंकवादियों को सौंपने के लिए कहा था. टुंडा कथित तौर पर कट्टरपंथी बन गया और 1985 में जेहादी ताकतों में शामिल हो गया. क्योंकि उसके कुछ रिश्तेदार महाराष्ट्र के भिवंडी में सांप्रदायिक दंगों में मारे गए थे. टुंडा को दाऊद इब्राहिम का करीबी माना जाता था. उसे 2013 में गिरफ्तार किया गया था. उस पर भारत भर में कई बम विस्फोटों में शामिल होने का भी संदेह था.

