बीकानेर। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. स्पेस सेक्टर को तीन हिस्सों में बांटकर उनमें FDI का अलग-अलग हिस्सा तय किया गया है. सबसे पहले इन तीन सेक्टरों के बारे में जानते हैं…
संशोधित FDI नीति के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति है. संशोधित नीति के अंतर्गत उदारीकृत प्रवेश मार्गों का उद्देश्य संभावित निवेशकों को अंतरिक्ष में भारतीय कंपनियों में निवेश करने के लिए आकर्षित करना है. संशोधित नीति के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के लिए बताया गया रूट इस प्रकार हैं
– 49 फीसदी तक FDI… लॉन्च व्हीकल यानी रॉकेट, उससे संबंधित सिस्टम या सब-सिस्टम, स्पेसपोर्ट का निर्माण ताकि स्पेस्क्राफ्ट की लॉन्चिंग और रिसीविंग हो सके. इसके ऊपर FDI आएगा तो वह सरकारी रूट के तहत आएगा.
– 74 फीसदी तक FDI… सैटेलाइट निर्माण और संचालन, सैटेलाइट डेटा प्रोडक्ट, ग्राउंड सेगमेंट और यूजर सेगमेंट. इससे ज्यादा FDI हुआ तो सरकारी रूट के तहत आएगा.
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– 100 फीसदी तक FDI… सैटेलाइट, ग्राउंड सेगमेंट और यूजर सेगमेंट के कंपोनेंट और सिस्टम और सब-सिस्टम का निर्माण.

