बीकानेर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीए सरकार के एक दशक के कामकाज को लेकर संसद में श्वेत पत्र जारी किया. इसमें कहा गया कि बीजेपी को विरासत में जो इकोनॉमी मिली, उसकी हालत काफी खराब थी. इसके बाद से हंगामा मचा हुआ है. भाजपा के जवाब में विपक्ष ने ब्लैक पेपर निकाल दिया, जो उल्टे सत्ता पर आरोप लगा रहा है. ये दोनों ही पेपर्स सरकारी दस्तावेज हैं, जो समय-समय पर या जरूरत के मुताबिक जारी होते आए हैं.
क्या है व्हाइट पेपर ये सरकारी डॉक्युमेंट है, जो किसी खास मुद्दे पर जानकारी और फैक्ट्स देता है. इस पेपर का मकसद आगे चलकर पॉलिसी को आकार देना रहता है. सरकार जब भी श्वेत पत्र लाने का एलान करती, या लाती है तो साफ है कि वो किसी टॉपिक पर चर्चा या सुझाव लेना-देना चाहती है. ये पिछले सालों के खोया-पाया का हिसाब भी हो सकता है.
क्या खास होता है व्हाइट पेपर में
– इसमें किसी मुद्दे या पॉलिसी पर स्पेसिफिक बात रहती है
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– श्वेत पत्र में राय या पूर्वाग्रह नहीं होते, बल्कि फैक्ट्स पर बात होती है.
– कोई खास पॉलिसी लाने या उसमें बदलाव का इशारा रहता है.
– इसमें प्रपोजल और सिफारिश होती है कि क्या नया किया जाए.
– व्हाइट पेपर में एक्टपर्ट की राय भी होती है, जो डेटा पर आधारित हो.
क्या है ये ब्लैक पेपर
श्वेत पत्र की तुलना में इसमें किसी मुद्दे या पॉलिसी पर राय ज्यादा दिखती है. ब्लैक पेपर में कोई विवादास्पद बात भी उठाई जा सकती है, साथ ही उसके प्रमाण भी होते हैं.
क्या खासियत है इसकी
– इसमें मुद्दे या नीति का विश्लेषण होता है, और राय दी जाती है.
किसी चल रही पॉलिसी को लेकर सवाल उठाए जाते हैं.
– ब्लैक पेपर अक्सर चुनौती देने की भूमिका अदा करता है.
– इसमें वर्तमान नीतियों में चेंज की बात, और ऑप्शन सुझाए जाते हैं.

