बीकानेर। चीन के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट से निवेशकों की नींद उड़ गई है. महज 3 साल में चीन के मार्केट कैपिटलाइजेशन से 7 ट्रिलियन डॉलर साफ हो गए हैं. इस गिरावट के बाद चीन का मार्केट रेगुलेटर भी एक्टिव मोड में आ गया है. बाजार के सेंटीमेंट्स को मजबूत करने के लिए चीनी मार्केट रेगुलेटर ने मार्केट में हेरफेर, गलत तरीके से हो रही शॉर्ट सेलिंग और वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए नियमों में बदलाव की बात कही है. चीन के बाजार नियामक का कहना है कि गिरवी रखे शेयरों से जुड़े नियमों में बदलाव किया जाएगा.
दरअसल, फरवरी 2021 में नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से चीन के शेयर मार्केट में लगातार गिरावट आ रही है. 2024 की बेहद खराब शुरुआत ने तो हालात को और नाजुक बना दिया है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है.
शेयर बाजार में गिरावट का रियल एस्टेट जिम्मेदार!
चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में गंभीर संकट और देश की अर्थव्यवस्था के कमजोर प्रदर्शन ने शेयर बाजार को दबाव में ला दिया है. वहीं अमेरिका के साथ गहराता तनाव भी चीन के शेयर मार्केट में गिरावट की बड़ी वजह है. ऐसे में शेयर बाजार से नुकसान खाने वाले निवेशक अमेरिकी दूतावास के ब्लॉग अकाउंट और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी निराशा और नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. शेयर बाजार में इस गिरावट से घबराए चीन ने लगातार अर्थव्यवस्था में भरोसा जगाने और शेयर बाजार की लंबी मंदी को रोकने की कोशिशें की हैं. लेकिन चीन की इकॉनमी में इस कदर छेद हो गए हैं कि उन्हें भरने के तमाम प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं.

