डिम्पल की कलम से
बीकानेर। पिछले कुछ सालों से क्षैत्र में भारतीय संस्कृति से होने वाले विवाह समारोह में प्री वैडिंग के नाम पर एक नया प्रचलन सामने आया है। इसके तहत होने वाले दूल्हा-दुल्हन अपने परिवारजनों की सहमति से शादी से पूर्व फोटोग्राफर के एक समूह के साथ राजस्थान एवं अन्य राज्यों के अलग-अलग सैर सपाटे की जगह बड़ी होटलों, हेरिटेज बिल्डिंगों, समुन्द्र बीच अन्य ऐसी जगहों पर जहाँ सामान्यत: पति पत्नी शादी के बाद हनीमून मनाने जाते हैं. जाकर अलग-अलग और कम से कम परिधानों में एक दूसरे की बाहों में समाते हुए वीडियो शूट करवाते हैं।फिर ऐसी वीडियो फोटोग्राफी की शादी के दिन एक बड़ी सी स्कीन लगा कर जहाँ लडक़ी और लडक़े के परिवार से जुड़े तमाम रिश्तेदार मौजूद होते हैं, की उपस्थिति में सार्वजनिक रूप से उस जोड़े को वो सब करते हुए दिखाया जाता है जिनकी अभी शादी भी नहीं हुई है। जिनकी जीवन साथी बनने के साक्षी बनाने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिये ही सगे संबंधियों और सामाजिक लोगों को वहाँ बुलाया जाता है लेकिन यह क्या गेट के अंदर घुसते ही जो देखने को मिलता है वह शर्मसार करने वाला होता है। जिस भावी जोडे को हम यहाँ आशीर्वाद देने पहुँचते हैं, वो वहाँ पहले से ही एक दूसरे की बाहों में झूल रहे होते हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब दोनों परिवारों की सहमति से होता है। लडक़ा-लडक़ी कई दिन तक बाहर रह कर साथ में कई रातें बिता चुके होते हैं। यह सब देख कर एक विचार मन में आता है जब सब कुछ हो चुका है तो आखिर हमें यहाँ क्यों बुलाया गया है। यह शुरुआत अभी उन घरानों से हो रही है, जो समाज के नेतृत्वकर्ता हैं जो समाज सुधार की दिशा में कार्यक्रम करते रहते हैं। ऐसे बड़े परिवार ऐसी शादियों को जो अपने पैसों के बल पर इस प्रकार की गलत प्रवर्तियों को बढ़ावा देकर समाज के छोटे तबके के परिवारों को संकट में डाल रहे हैं। इसलिए ऐसी शादियों का सामाजिक बहिष्कार करें।

