नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री Sher Bahadur Deuba और उनकी पत्नी Arzu Rana Deuba के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। इस कदम ने देश की सियासत को गरमा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।
कोर्ट का सख्त रुख
काठमांडू की जिला अदालत ने जांच एजेंसियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। जज महेंद्र खड्का की बेंच ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी जरूरी है।
बताया जा रहा है कि दोनों फिलहाल नेपाल में मौजूद नहीं हैं, जिसके चलते सरकार अब Interpol की मदद लेने की तैयारी में है। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की स्थिति में उन्हें विदेश से हिरासत में लेकर नेपाल लाया जा सकता है।
मामला क्या है?
यह पूरा विवाद पिछले साल हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। सितंबर में Nepal में उभरे युवा आंदोलन के दौरान कई बड़े नेताओं के घरों को निशाना बनाया गया था। इसी दौरान देउबा के आवास से जले हुए नोटों के वीडियो सामने आए थे, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी।
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फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई कि ये नोट असली थे, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग का शक गहराया और जांच एजेंसियों ने मामला दर्ज किया।
जांच का दायरा बढ़ा
इस केस में सिर्फ देउबा दंपति ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। इनमें K. P. Sharma Oli और Pushpa Kamal Dahal जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
वहीं, पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्का पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं। इससे साफ है कि यह मामला नेपाल की राजनीति में गहराई तक पहुंच चुका है।
विदेश में मौजूद देउबा दंपति
जानकारी के अनुसार, देउबा और उनकी पत्नी फरवरी के अंत में इलाज के लिए सिंगापुर गए थे। इसके बाद वे नेपाल नहीं लौटे और बाद में उनकी लोकेशन हांगकांग तक बताई गई।
इस बीच नेपाल में चुनाव भी हो चुके हैं, लेकिन देउबा ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने पहले ही पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
बदलती राजनीति का संकेत
हालिया चुनावों में नई राजनीतिक ताकतों का उभार देखने को मिला है, जिससे पारंपरिक दलों पर दबाव बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत हो सकती है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इंटरपोल रेड नोटिस जारी होगा और देउबा दंपति को नेपाल वापस लाया जा सकेगा।
यदि ऐसा होता है, तो यह नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले समय में इस मामले का असर सरकार, विपक्ष और जनता—तीनों पर देखने को मिलेगा।


