बीकानेर। आरटीई (Right to Education) को लेकर प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। शहर में आयोजित एक बैठक में संचालकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जब तक प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक सत्र 2026-27 में इन कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिए जाएंगे।
आनंद निकेतन में आयोजित इस बैठक में विभिन्न निजी शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर ‘भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं’ का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। बैठक की अगुवाई पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने की।
प्री-प्राइमरी कक्षाओं को लेकर विवाद
संचालकों का कहना है कि पीपी-3, पीपी-4 और पीपी-5 कक्षाओं के तहत आने वाले छात्रों के लिए सरकार द्वारा भुगतान को लेकर अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में इन कक्षाओं में प्रवेश देना आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
खैरीवाल ने बताया कि इस संबंध में 17 मार्च को शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। ज्ञापन में 10 दिन के भीतर भुगतान से जुड़े स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा में निर्णय नहीं होने पर राज्यभर के निजी स्कूल प्रवेश प्रक्रिया रोक देंगे।
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हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला
बैठक में यह भी कहा गया कि 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान को लेकर आदेश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संचालकों ने आरोप लगाया कि सरकार भुगतान से बचने की कोशिश कर रही है।
लंबित भुगतान भी बना मुद्दा
केवल आगामी सत्र ही नहीं, बल्कि वर्तमान सत्र 2025-26 और पिछले वर्षों के आरटीई भुगतान भी लंबित हैं। संचालकों ने इन बकाया राशि को लेकर भी संघर्ष तेज करने की बात कही है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अभय सिंह टाक ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो व्यापक विरोध किया जाएगा। वहीं, अन्य वक्ताओं ने एकजुटता बनाए रखते हुए आंदोलन की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।
इस फैसले से आने वाले समय में हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि आरटीई के तहत बड़ी संख्या में बच्चे निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते हैं।

