नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लगभग बंद हो गया है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है। इस गलियारे से भारत का अधिकांश LPG आयात होता है, और सप्लायर कंपनियों ने फोर्स मेज्योर नोटिस जारी कर आपूर्ति अस्थायी रूप से रोकने की बात कही है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस गर्मी में बिजली की कटौती नहीं होगी। बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि देश की बिजली मांग पूरी करने के लिए चार-स्तरीय इमरजेंसी योजना तैयार की गई है।
सरकार का इमरजेंसी प्लान:
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कोयला पावर प्लांट री-स्टार्ट: गुजरात के 4 गीगावाट बंद कोयला प्लांट को चालू किया जाएगा, जिससे गैस की कमी पूरी होगी।
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सौर ऊर्जा: दिन की पीक डिमांड 270 GW को पूरा करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है।
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पवन ऊर्जा: कई विंड एनर्जी प्रोजेक्ट ग्रिड से जोड़ने की प्रक्रिया में हैं, इन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
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बैटरी स्टोरेज: 2.5 गीगावाट आवर की बैटरी स्टोरेज क्षमता शाम की पीक डिमांड पूरी करेगी।
इस बीच कोयला मंत्रालय ने लगातार दूसरे वर्ष भारत का 1 अरब मेट्रिक टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड पूरा होने की जानकारी दी। इससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। सरकार ने सभी कोयला आधारित बिजली उत्पादकों को निर्देश दिया है कि वे गैस सप्लाई बंद होने पर भी बिजली की आपूर्ति निरंतर जारी रखें।
संकट का कारोबार पर असर:
LPG की कमी से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। घरेलू सिलेंडर की कीमत और उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। वहीं, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र जैसे Adani Green, NTPC Renewable की डिमांड बढ़ने की संभावना है। बैटरी स्टोरेज सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट भारत को गैस आयात पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाने की चेतावनी देता है। सरकार का फोकस फिलहाल इस गर्मी को बिना बिजली कटौती के निकालने पर है।

