मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने साफ तौर पर अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। इस युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
इसी बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी थी, ताकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक विशेष ‘जनरल लाइसेंस’ जारी कर समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी।
हालांकि, इस राहत के बाद भी ईरान ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि उसके पास निर्यात के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में उनके पास न तो अतिरिक्त भंडार है और न ही ऐसी उत्पादन क्षमता, जिसे तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजा जा सके।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन जैसे देश ईरान के कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार बने हुए हैं और कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा वहीं जाता है। ऐसे में आपूर्ति सीमित रहने से अन्य देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव को समाप्त करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, ईरान के इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

